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फसल की खेती (Crop Cultivation)

धान DSR (डायरेक्ट सीडेड राइस) प्रबंधन: बेहतर फसल स्थापना के लिए ICAR-CRRI की सलाह

08 अगस्त 2026, नई दिल्ली: धान DSR (डायरेक्ट सीडेड राइस) प्रबंधन: बेहतर फसल स्थापना के लिए ICAR-CRRI की सलाह –

DSR तकनीक में शुरुआती प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण

डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक श्रम और पानी की बचत के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रही है। हालांकि, इस पद्धति में फसल की शुरुआती अवस्था सबसे संवेदनशील होती है। यदि खरपतवार नियंत्रण, मिट्टी की नमी और पोषक तत्व प्रबंधन पर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो इसका सीधा असर पौधों की बढ़वार और अंतिम उपज पर पड़ सकता है।

आईसीएआर–केन्द्रीय धान अनुसंधान संस्थान (ICAR-CRRI), कटक ने जुलाई 2026 के द्वितीय पखवाड़े के लिए जारी कृषि परामर्श में DSR किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।

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खरपतवार नियंत्रण पर दें विशेष ध्यान

संस्थान के अनुसार डायरेक्ट सीडेड धान में खरपतवार नियंत्रण सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। अपलैंड क्षेत्रों में खरपतवार निकलने के 8–10 दिन बाद या 2–3 पत्ती अवस्था में बिसपायरीबैक सोडियम का प्रयोग किया जा सकता है। वहीं, लो-लैंड क्षेत्रों में भी समय पर अनुशंसित शाकनाशी का उपयोग प्रभावी नियंत्रण के लिए आवश्यक बताया गया है। जिन खेतों में शाकनाशी का प्रयोग नहीं किया गया है, वहां यांत्रिक या हाथ से निराई तथा आवश्यकतानुसार ‘ब्यूशेनिंग’ अपनाने की सलाह दी गई है।

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नमी के अनुसार करें पोषण प्रबंधन

संस्थान ने स्पष्ट किया है कि पहली टॉप ड्रेसिंग तभी करनी चाहिए, जब मिट्टी में पर्याप्त नमी उपलब्ध हो। वहीं, यदि खेत सूखा हो तो खरपतवारनाशी का छिड़काव नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे। वर्षा आधारित क्षेत्रों में मौसम के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाना आवश्यक है।

समेकित प्रबंधन से मिलेगा बेहतर परिणाम

विशेषज्ञों के अनुसार DSR तकनीक में नियमित खेत निरीक्षण, समय पर खरपतवार नियंत्रण, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और मौसम के अनुसार कृषि कार्य अपनाने से बेहतर पौध स्थापना तथा अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

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