फसल की खेती (Crop Cultivation)

धान की इन टॉप-5 किस्मों की करें खेती, 7.5 टन प्रति हेक्टेयर तक मिल सकती है उपज; जानें खासियत

13 अगस्त 2026, नई दिल्ली: धान की इन टॉप-5 किस्मों की करें खेती, 7.5 टन प्रति हेक्टेयर तक मिल सकती है उपज; जानें खासियत – धान देश की प्रमुख खरीफ फसलों में शामिल है और इसकी खेती अलग-अलग जलवायु, मिट्टी और पानी की उपलब्धता वाले क्षेत्रों में की जाती है। ऐसे में किसानों के लिए अपने खेत की परिस्थितियों के अनुसार सही धान की किस्म का चुनाव अच्छी पैदावार के लिए बेहद जरूरी है। ICAR-राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (ICAR-NRRI), कटक ने अलग-अलग कृषि परिस्थितियों के लिए कई उन्नत धान की किस्में विकसित की हैं। इनमें सताब्दी, नवीन, राजलक्ष्मी, अजय और सत्यकृष्ण जैसी किस्में शामिल हैं, जो कई प्रमुख रोगों और कीटों के प्रति सहनशीलता रखती हैं।

इनमें कुछ किस्में सिंचित और उथले निचले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हैं। किसान इन वैरायटी की खेती करके औसत 4 से 7.5 टन प्रति हेक्टेयर तक उत्पादकता हासिल कर सकते है।

सताब्दी

सताब्दी (CR 146-7027-224) मध्यम अवधि की किस्म है, जो करीब 120 दिन में तैयार होती है। यह सिंचित क्षेत्र के लिए उपयुक्त है और पश्चिम बंगाल में खेती के लिए जारी की गई है। इसके दाने लंबे और पतले होते हैं। इसकी औसत उत्पादकता 4 से 5 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है। यह बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट, शीथ ब्लाइट और शीथ रॉट जैसे रोगों के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है।

नवीन

नवीन (CR 749-20-2) करीब 115-120 दिन में तैयार होने वाली अर्ध-बौनी किस्म है। इसे ऊपरी और सिंचित दोनों क्षेत्रों में उगाया जा सकता है। खरीफ में इसकी औसत उपज 4-5 टन प्रति हेक्टेयर, जबकि रबी में 5-6 टन प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है। यह तना छेदक, ब्लास्ट और ब्राउन स्पॉट के प्रति प्रतिरोधी है।

राजलक्ष्मी

राजलक्ष्मी (CRHR-5) करीब 125-135 दिन में तैयार होने वाली लोकप्रिय हाइब्रिड किस्म है। यह सिंचित और बोरो क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। इसके लंबे और पतले दाने होते हैं तथा औसत उत्पादकता 7-7.5 टन प्रति हेक्टेयर है। इसमें तना छेदक, ब्राउन प्लांट हॉपर, लीफ ब्लास्ट, बैक्टीरियल ब्लाइट और गॉल मिज सहित कई कीट-रोगों को सहन करने की क्षमता बताई गई है। यह कल्ले निकलने की अवस्था में 7-10 दिन तक पानी के जमाव को भी सहन कर सकती है।

अजय

अजय (CRHR-7) भी मध्यम अवधि की हाइब्रिड किस्म है, जो करीब 125-135 दिन में तैयार होती है। इसे सिंचित और उथले निचले क्षेत्रों में उगाने के लिए जारी किया गया है। इसकी औसत उपज 7-7.5 टन प्रति हेक्टेयर है। यह ब्लास्ट के प्रति प्रतिरोधी और राइस टुंग्रो वायरस के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है। पानी के जमाव को भी 7-10 दिन तक सहन कर सकती है।

सत्यकृष्ण

सत्यकृष्ण (CR AC 2221-43) करीब 135 दिन में तैयार होने वाली किस्म है। यह सिंचित और उथले निचले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। इसके लंबे और पतले दाने होते हैं और औसत उत्पादकता 5-6 टन प्रति हेक्टेयर है। यह नेक ब्लास्ट और शीथ ब्लाइट के प्रति प्रतिरोधी तथा येलो स्टेम बोरर और गॉल मिज के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है।

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