आंवला: पाकशाला से प्रयोगशाला तक

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  • अंजली सिंह
    एमएससी (प्रसार शिक्षा एवं संचार प्रबंधन विभाग)
  • पंकज कुमार, एम.एस.सी. (कृषि प्रसार)
    चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी वि.वि., कानपुर
  • अमन कुमार मौर्य, एमएससी (उद्यान, फल विभाग)
    स्नेहा सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, उद्यान विज्ञान विभाग
    आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी वि.वि., अयोध्या

9 जून 2022, भोपाल । आंवला: पाकशाला से प्रयोगशाला तक – भारत के औषधीय पौधों की सूची में आंवला बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ये कई अन्य गुणों से भरपूर है। आंवला युकोरबिएसी परिवार का पौधा है। आंवला प्राकृतिक रूप से भारत, श्रीलंका, इराक, मलेशिया, चीन आदि में पाए गए हैं। इसका स्वदेशी फल हर तरह के वातावरण के अनुकूल अपने आप को ढाल कर बढ़ता है। आंवला में एंटी एसिड और एंटी वाइरल गुण पाए जाते हैं। यह बहुत जल्दी खराब होने वाला फल है।

पौराणिक साहित्य- भारतीय इतिहास में आयुर्वेद का महत्व पूरे विश्व में प्रचलित है। अपने अद्भुत औषधीय एवं पोषक गुणों के कारण यह भारतीय पौराणिक साहित्य में भी अंकित किया गया है। आंवला पेड़ की उत्पत्ति सबसे पहले ब्रह्मा के आंसू से हुई थी ध्यान करते समय। महर्षि चरक ने इस फल को जीवन दात्री अथवा अमृत फल के समान लाभकारी माना है। आंवला के वृक्ष को कल्प वृक्ष के रूप में माना जाता है। हिन्दू धर्म में कार्तिक मास के अक्षय नवमी के दिन आंवला के पेड़ के नीचे भोजन पकाने और खाने का महत्व बताया गया है।

उपयोग- आंवला का फल बहुत सारी बीमारियों के लिए उपयोगी है। आयुर्वेद में एक आंवले के सेवन से कम से कम 20 बीमारियों से लडऩे की बात कही गई है।
आंवला में विटामिन- सी और एंटीआक्सीडेंट की भरपूर मात्रा होती है। इसके अलावा और भी कई सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह आंखों, बालों और त्वचा के लिए काफी फायदेमंद है। इसमें

मौजूद विटामिन– सी को इम्युनिटी और श्वसन तंत्र के लिए अच्छा माना जाता है। अम्लीय गुण होने के कारण यह गठिया रोग में भी लाभ पहुंचाता है। आंवला शरीर के पित्त, वात और कफ को संतुलित करने में मदद करता है। डाक्टर सलाह देते हैं आंवला का उपयोग एनीमिया, अर्श, मधुमेह, कब्ज, हेमटयूरिया, अस्टियोपोरोसिस, कोलाइटिस जैसे रोगों में सेवन करना चाहिए।

पोषक तत्व 100 ग्राम कच्चे आंवला में

प्रोटीन- 1 ग्राम, वसा- 0.50 ग्राम
विटामिन-सी- 476 मि.ग्रा.
विटामिन-ए- 290 आई.यू. पोटेशियम-198 मि.ग्रा.
भण्डारण – आंवला का फल 2 से 3 महीने के लिए उपलब्ध होता है। इसलिए आंवला के फल का भण्डारण एक उपयुक्त तापमान पर कर सकते हैं। उसकी उपलब्धता समय बढ़ाने के लिए और स्थिर मूल्य के लिए करते हैं। इसलिए घर की गृहणियां इसका संरक्षण कर सकती हैं। घर पर ही साथ ही इसका उपयोग वो कभी भी कर सकती हैं। साथ ही वो आंवले से बने पदार्थों को बाजार में उपलब्ध कराकर महिला व्यापार के क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। महिलाएं आंवला से कई सारी खाद्य पदार्थ घर पर ही बना सकती हैं, जैसे आंवला कैंडी, जूस, मुरब्बा आदि। (क्रमश:)

आंवला तेल के स्वास्थ्य लाभ

  • त्वचा के लिए अच्छा है।
  • बालों का झडऩा कम करता है।
  • आंखों के लिए स्वस्थ।
  • बालों के लिए अच्छा कंडीशनर।
  • हृदय को स्वस्थ रखता है।
  • बालों को समय से पहले सफेद होने से रोकता है।
  • विटामिन सी का समृद्ध ोत।
  • गले में खराश को ठीक करता है।
  • सूखी पपड़ी हालत में सुधार।
  • एंटीफंगस गुण।
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