विशेष आलेख
विकास के नाम पर विनाश को रोकें पर्यावरण चिंतन भारतीय वन सर्वे संस्थान देहरादून की वर्ष 2017 की रिपोर्ट में म.प्र. में तेजी से खत्म होते वन क्षेत्र को खतरे के रूप में अंकित किया है। राज्य के 51 जिलों
विकास के नाम पर विनाश को रोकें पर्यावरण चिंतन भारतीय वन सर्वे संस्थान देहरादून की वर्ष 2017 की रिपोर्ट में म.प्र. में तेजी से खत्म होते वन क्षेत्र को खतरे के रूप में अंकित किया है। राज्य के 51 जिलों
श्री सारंग ने कड़कनाथ एप का लोकार्पण किया भोपाल। सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री विश्वास सारंग ने गत दिनों मध्यप्रदेश कड़कनाथ एप का लोकार्पण किया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव सहकारिता श्री के.सी. गुप्ता, आयुक्त सहकारिता श्रीमती रेणु पंत,
इंदौर। कोरोमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड (फर्टिलाइजर डिवीजन) ने अपनी फैक्ट्री काकीनाडा (आंध्रप्रदेश) का म.प्र. के डीलरों को भ्रमण करवाया। इसमें कंपनी के डीलरों को ग्रोमोर 28: 28:0 और 14: 35:14 अन्य एनपीके ग्रेड की उत्पादन पद्धति को विस्तृत रूप से समझाया
(विशेष प्रतिनिधि) भोपाल। संचालनालय कृषि में गत दिनों आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में प्रदेश को लगातार मिले पांचवें कृषि कर्मण अवॉर्ड के क्रम में संचालक कृषि श्री मोहन लाल के कुशल नेतृत्व में तीन बार प्राप्त इस विशिष्ट उपलब्धि के
बालाघाट जिला वैसे तो परंपरागत रूप से धान की खेती वाले क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता है। लेकिन धान की खेती के साथ ही इस जिले के किसान अब सब्जियों की खेती में भी हाथ आजमाने लगे हैं और
जुगाड़ से बनाई कहते हैं ‘कृषक स्वयं ही अविष्कारक है’ किंतु यह सही है कि कृषक का सबसे अधिक समय खेत पर ही बीतता है। उसके मनमानस में खेती के प्रति नित नये-नये विचार, समस्या, समाधान आते रहते हैं। ऐसे
समाधान-वर्ष भर खाये जाने वाली सब्जी बैंगन की खेती आप कर सकते हैं। निम्न बिन्दुओं पर ध्यान दें। वर्षाकालीन बैंगन के लिये नर्सरी की बुआई फरवरी-मार्च में लगाई जाती है। मुख्य खेत में रोपाई 30-40 दिनों बाद कर दी जाती
समाधान- चौलाई की भाजी आदिकाल से लगाई जाती रही है। इसमें प्रोटीन एवं विटामिन ‘ए’ अधिक मात्रा में मिलता है। आप चौलाई लगायें निम्न तकनीकी भी अपनाएं- सभी प्रकार की भूमि में लगाई जा सकती है। दोमट भूमि सर्वोत्तम होती
समाधान– आपको आधे एकड़ के लिए 100 किलोग्राम शकर्स की व्यवस्था करनी होगी। आप इसकी रोपाई जून में वर्षा आरम्भ होने के पूर्व करें। लगाने के पूर्व शकर्स को 10-12 से.मी. लम्बाई के काट लें। लाइन से लाइन की दूरी
समाधान– सदाबहार की खेती के लिए हल्की दोमट से रेतीली भूमि जिसमें पानी का निकास अच्छा हो उपयुक्त रहती है। खेत तैयार करते समय 50-60 क्विंटल गोबर खाद तथा 100 किलोग्राम सुपरफास्फेट तथा 50 किलो नीम की खली मिट्टी में