गन्ने के कीट एवं रोकथाम
गन्ने की विभिन्न अवस्थाओं एवं मौसम के आधार पर देश में लगभग 275 से अधिक प्रकार के कीट इस प्रमुख नगद फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। इनमें से प्रदेश में सक्रिय भूमिगत, बेधक एवं चूसक कीटों के बारे में आवश्यक
फसल की खेती (Crop Cultivation) से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। गेहूं, धान, सोयाबीन, मक्का, चना, सरसों, कपास, दालों और तिलहनी फसलों की उन्नत खेती, बुवाई, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण के विशेषज्ञ सुझाव पढ़ें।
गन्ने की विभिन्न अवस्थाओं एवं मौसम के आधार पर देश में लगभग 275 से अधिक प्रकार के कीट इस प्रमुख नगद फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। इनमें से प्रदेश में सक्रिय भूमिगत, बेधक एवं चूसक कीटों के बारे में आवश्यक
सौंफ की खेती मुख्य रूप से मसाले के रूप में की जाती है। सौंफ के बीजों से ओलेटाइल तेल (0.7-1.2 प्रतिशत) भी निकाला जाता है, सौंफ एक खुशबूदार बीज वाला मसाला होता है। सौंफ के दाने आकार में छोटे और
प्रिय किसान भाईयो, गुलाबी इल्ली का नियंत्रण करने के लिये नीचे दिए गए उपायों का उपयोग करें। गुलाबी इल्ली को कैसे पहचानें? नीचे दिए गए चित्रों से गुलाबी इल्ली के प्रकोप को पहचानने में मदद मिलेगी। आर्थिक नुकसान का स्तर
कपास, धान,सब्जियां,मिर्च कुकरबिट्सइल्लियां,बेधक एवं रसचूसक कीटकपास, गेहूंरसचूसक कीट, दीमककपास, दलहन, धानसमस्त प्रकार की इल्लियांकपास, धान, दलहन,गन्नाइल्लियां, लाल मकड़ी एवं बेधक कीटनाशकों के तकनीकी नाम और उनकी विशेषताएं रसायनिक
तना मक्खी: इस कीट की सूंडी अवस्था पौधे के तने को नुकसान पहुंचाती है। सुंडियां जड़ों से लगभग 40 से.मी. ऊपर तने में घुसकर अंदर ही अंदर टेढ़ी-मेढ़ी सुरंग बनाकर तने को खोखला कर देती है। जैसे-जैसे पौधे की लंबाई
कपास पर संपूर्ण विश्व में लगभग 1326 कीट प्रजातियां पाई गई हैं जिनमें से 162 प्रजातियां हमारे देश में भी कपास उत्पादक क्षेत्रों में पायी गई हैं। इन 162 कीट प्रजातियों में से 9 कीट प्रजातियां लगभग 50 प्रतिशत कपास
कुष्मांडकुल को कद्दूवर्गीय सब्जियों के नाम से भी पुकारा जाता है। इस कुल की सभी सब्जियों का उपयोग आहार के रूप में किया जाता है अधिकांश कद्दूवर्गीय सब्जियों का उत्पत्ति स्थान भारत हैं। इस वर्ग की सब्जियों में खीरा, ककड़ी
”मृदा के स्वास्थ्य को सुधारना है। फसलों के उत्पादन को बढ़ाना है।।” जिप्सम के उपयोग से तिलहनी, दलहनी व अनाज वाली फसलों के उत्पादन की गुणवत्ता में बढ़ोतरी के साथ-साथ भूमि का स्वास्थ्य भी बना रहता है। जिप्सम पोषक तत्व
सोयाबीन -गेहूं फसल चक्र अपनाने से गेहूं की पैदावार में काफी बढ़ोतरी पाई गई है। सोयाबीन के बाद गेहूं लगाने पर गेहूं फसल को सोयाबीन फसल द्वारा छोड़ी गई नत्रजन एवं अन्य तत्व फायदा पहुँचाते हैं जिससे फसल उत्पादन बढ़
खेत की तैयारी अच्छे निथार वाले बालू भूमि की तैयारी एक या दो बार बक्खर चलाकर मिट्टी भुरभुरी कर लें। आखिरी बार बखरनी के पहले एक हेक्टेयर में 20 किलो फाली डाल डस्ट डालकर मिला लें और 15 टन गोबर