उड़द की खेती
भूमि का चुनाव:- हल्की रेतीली दोमट या मध्यम प्रकार की भूमि जिसका पी.एच. 7- 8 के मध्य हो व पानी का निकास की समुचित व्यवस्था हो वह उड़द के लिये उपयुक्त है। खेतों को ट्रैक्टर या देशी हल से दो-तीन
फसल की खेती (Crop Cultivation) से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। गेहूं, धान, सोयाबीन, मक्का, चना, सरसों, कपास, दालों और तिलहनी फसलों की उन्नत खेती, बुवाई, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण के विशेषज्ञ सुझाव पढ़ें।
भूमि का चुनाव:- हल्की रेतीली दोमट या मध्यम प्रकार की भूमि जिसका पी.एच. 7- 8 के मध्य हो व पानी का निकास की समुचित व्यवस्था हो वह उड़द के लिये उपयुक्त है। खेतों को ट्रैक्टर या देशी हल से दो-तीन
धान (चावल) महत्वपूर्ण खाद्य स्रोत है और धान (चावल) आधारित पद्धति खाद्य गरीबी उम्मूलन और बेहतर आजीविका के लिए जरूरी है। विश्व में धान (चावल) के कुल उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा कम आय वाले देशों में छोटे स्तर
ककोड़ा (खेख्सा) एक बहुवर्षीय कद्दूवर्गीय भारत के कुछ क्षेत्रों में उगाया जाता है। विशेषकर जंगली क्षेत्रों में खेख्सा स्वयं उगते हुए देखे जा सकते हैं, इसलिए इन क्षेत्रों के आस-पास के लोग इसकी सब्जी के रूप में बहुतायत से उपयोग
भूमि का चुनाव हल्दी की खेती सामान्यत: सभी प्रकार की भूमियों में की जा सकती है। उचित जलनिकास वाली बलुई दोमट या चिकनी दोमट मिट्टी जिसमें जीवांश की अच्छी मात्रा हो, हल्दी के लिये उपयुक्त होती है। इसकी अच्छी पैदावार
भूमि की तैयारी:- उड़द सभी प्रकार की भूमि मेंं (अधिक रेतीली भूमि को छोड़कर) सफलता पूर्वक पैदा की जा सकती है। परन्तु हल्की रेतीली, दोमट या मध्यम प्रकार की भूमि में जिसमें पानी का निकास अच्छा हो, उड़द के लिये
भूमि की तैयारी – खीरे के लिए कोई खास तैयारी नहीं करनी पड़ती क्योंकि तैयारी भूमि की किस्म के ऊपर निर्भर होती है। बलुई भूमि के लिये अधिक जुताई की आवश्यकता नहीं होती। इसलिये 2-3 जुताई करनी चाहिए तथा पाटा
इन्दौर। सोयाबीन की खेती में साल दर साल समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। जैसे बीज व भूमिजनित बीमारियां जो फफूंदियों द्वारा उत्पन्न होती हैं, जिसके कारण अंकुरण में भारी कमी आ जाती है, इससे किसान बीज की मात्रा बढ़ाकर बोवनी
राघव जैसवाल, बदनावर समाधान- आपका प्रश्न सामयिक है. सोयाबीन लगाने का समय आ रहा है. जातियों का चयन तथा प्राप्ति स्थल जानना जरूरी है तो जानिये इन पंक्तियों से- जातियों में जे.एस. 335, जे.एस. 80-21, जे.एस. 71-05, जे.एस. 90-41, अहिल्या-1,
बीज क्या है, व्यवसायिक दृष्टि से बीज की परिभाषा के अंतर्गत लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न बीज के साथ-साथ फल, तना, जड़ व अन्य प्रवर्धन सामग्री से है जो अनुकूल वातावरणीय परिस्थितियों – नमी, ताप, वायु व प्रकाश की सुलभता और
बीज की विशेषताएं : अनुवांशिक रूप से शुद्ध होता है। भौतिक रूप से शुद्ध होता है। बीज का आकार, आकृति व रंग में समानता होती है। निर्धारित मानकों के अनुरूप अंकुरण क्षमता व नमी का होना। यह बीज जनित रोग