Crop Cultivation (फसल की खेती)

Crop Cultivation includes package of practices (Kheti ki Jankari) and innovations in farming practices (Beej Upchar, Kharpatwar niyantaran, rogon aur sankraman se suraksha)

Cereal crops (अनाज की फसल) – Gehu, Dhan, Makka, Jau, Bajra, Jowar, Ragi, Kodo, Kutki.

Oil seeds (तिलहन) – Soybean, Canola, Sarso, Surajmukhi, Moongfali.

Pulses (दलहन फसल) – Moong, Arhar, Tur, Chana, Masoor, Urad.

Fibre crops (रेशे वाली फसलें) – Kapas (Cotton), Jute. Tuber crops (कंद की फसलें) – Aalu, shakarkand, shaljam, Arbi.

Spice crops (मसाला फसलें) – ilichai, laung, haldi, adrak, lehsun, jeera, Kela, ganna (Sugarcane), Mirch, dhaniya.

Cash crops (नकदी फसलें) – Chai, Coffee, Tambaku. 

Vegetable crops (सब्जियों की फसलें) – Pyaz, tamatar, baingan, lauki, gilki, kaddu, bhindi, palak, methi, gobhi.

Fruit crops (फल) – Angoor, Aam, sab, kela, Santara, Anar, amrood ki kheti ki jankari.

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पर्यावरण हितैषी खेती

प्रत्येक अंचल की अपनी एक खास खुशबू होती है जो वहीं कि आबो-हवा से बनती और संवरती है किसी भी प्रदेश की संस्कृति मनुष्य की तीन मूलभूत आवश्यकताओं के आधार पर ही विकसित होती है। ये तीन मूलभूत आवश्यकता है।

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State News (राज्य कृषि समाचार)Crop Cultivation (फसल की खेती)

अरहर की जल्दी पकने वाली किस्में लगाएं

शाजापुर। कृषि विज्ञान केन्द्र, शाजापुर द्वारा गत दिनों ग्राम बज्जाहेड़ा में  अरहर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. एन.एस. सिकरवार, उपसंचालक पशु पालन, केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जी. आर. अम्बावतिया, श्री आर.एस. तोमर,

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खरपतवारों से बचाएं सब्जियां

खरीफ मौसम में रबी मौसम की तुलना में खरपतवारों का प्रकोप अधिक होता है। सब्जियों में उगने वाले खरपतवारों को मुख्यत: चार श्रेणियों में बांटा जा सकता है। खरपतवारों से हानियां: खरपतवार जहां एक ओर फसल के साथ प्रतिस्पर्धा करके

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सरसों में ओरोबैंकी का प्रबन्धन

ओरोबैंकी:- ओरोबैंकी या आग्या  या बादा या हड्डा (बु्रमरेप) की जातियां पूर्ण रूप से मूल परजीवी होती हैंं। यह विभिन्न फसलों पर आक्रमण करती हैं जिसमें सरसों, बैंगन, टमाटर, तम्बाकू, फूलगोभी, पत्तागोभी, शलजम और कई सोलोनेसी तथा क्रुसीफेरी कुल के

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चने की उन्नत खेती

खेत का चुनाव व तैयारी : मध्यम तथा भारी किस्म की भूमि चने के लिए अधिक उपयुक्त होती है। खेत को तैयार करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि मध्यम आकर के ढेले अवश्य बुआई के समय रहें। भूमि की

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रबी फसलों में सिंचाई का महत्व

पौधों के लिये जल की आवश्यकता – छोटे बढ़ते हुए पौधों में 85 से 90 प्रतिशत भाग केवल जल ही होता है। जल ही पौधों को कोशिकाओं में विद्यमान जीवद्रव्य (प्रोटोप्लाज्म) का एक आवश्यक अंग है। जीव द्रव्य में जल

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रबी फसलों में बीज का महत्व

मनुस्मृति में कहा गया है –     अक्षेत्रे बीजमुत्सृष्टमन्तरैव विनश्यति।     अबीजकमपि क्षेत्रं केवलं स्थण्डिलं भवत्।।     सुबीजम् सुक्षेत्रे जायते संवर्धते उपरोक्त    श्लोक द्वारा स्पष्ट किया गया है कि अनुपयुक्त भूमि में बीज बोने से बीज नष्ट हो जाते हैं

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आलू में रोग नियंत्रण के उपाय

आलू का अगेती अंगमारी रोग यह रोग आल्टनेरिया सोलेनाइ नामक फफूंद से उत्पन्न होता है। हर वर्ष लगभग सभी खेतों में थोड़े से अधिक मात्रा में पाया जाता है। अधिक प्रकोप हो जाने पर फसल की उपज में 50 –

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उड़द पड़ी सोयाबीन पर भारी

भोपाल। खरीफ फसलों में सर्वोच्च सोयाबीन पर कृषकों का कम रुझान हो गया है। सीजन में सोयाबीन उड़द, मक्का, मूंग, धान फसलों के उत्पादन में उड़द की भरपूर आवक मण्डी में देखी गई। पिछले वर्ष खरीफ में उड़द 1.94 क्विं.

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अब गेहूं तैयारी की बारी

उपयुक्त जलवायु क्षेत्र गेहूँ मुख्यत: एक ठण्डी एवं शुष्क जलवायु की फसल है अत: फसल बोने के समय 20 से 22  डिग्री सेंटीग्रेड से बढ़वार के समय इष्टतम ताप 25 डिग्री सेंटीग्रेड से  तथा पकने के समय  14 से 15

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