अमानक बीज : खंडवा में ईगल और सेठी पर प्रकरण दर्ज

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प्रमुख बिन्दु
– 70 प्रतिशत से कम अंकुरण अमानक
– नमूना एकत्र, परीक्षण, विश्लेषण प्रक्रिया लचर
– अमानक बीज विक्रय सरल दंड श्रेणी में
– कुशल बीज समितियों का अभाव
– बीज प्रमाणीकरण अधिकारी की मिलीभगत
(प्रकाश दुबे)
खंडवा। खरीफ सीजन प्रारंभ होते ही बीज,उर्वरक, कीटनाशक, टॉनिक का निर्माण करने वाली कंपनियां कुकरमुत्ते की तरह उग जाती है। समुद्र रूपी खरीफ सीजन में गलत ढंग से अधिक लाभ चाहे जो भी हो परिणाम से भली-भांति परिचित यह कंपनियां किसानों को चूना लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ती। प्रतिस्पर्धा के चलते हुए भूल से कभी-कभार विभाग के जाल में फंस जाती हैं। अन्यथा अपना उल्लू सीधा कर खरीफ सीजन में लाखों का मुनाफा बटोरकर कंपनियां आगामी सीजन की तैयारी में जुट जाती है। यही किसानों की बदहाली का कारण है। ऐसा ही प्रकरण खंडवा जिले में सेठी सीड्स इंडिया खंडवा एवं ईगल सीड्स एंड बायोटेक इंदौर का सामने आया है। दोनों कंपनियों की शिकायत मिलने पर तीन जिलों के बीज प्रमाणीकरण अधिकारियों की टीम ने ग्राम दोंदवाड़ा स्थित प्लांट एवं अन्य ठिकानों पर जांच कर 214 क्विं. अमानक (निम्न स्तर का) बीज पैकिंग करते हुए जब्त किया। कंपनियों से फर्जी टैग, सील एवं अन्य सामग्री पाई गई। दोनों कंपनियों के खिलाफ छैगांवमाखन थाने में प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। अमानक बीज कंपनियां सरकार के लचीले नियमों, लालची अफसरों, आंख मूंदी सरकार लचर प्रशासन की छत्रछाया में खूब पनपती है।

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