तिलहनी फसलों में सिंचाई
राई सरसों : सरसों वर्गीय सभी फसलें मुख्यतया वर्षा निर्भर क्षेत्रों में बोयी जाती हैं। ये फसलें मिट्टी से काफी गहराई से पानी प्राप्त कर सकती हैं। अत: इनकी उपज भूमि में संरक्षित नमी पर निर्भर करती हैं। परीक्षणों के
सरसों की खेती से जुड़ी ताज़ा खबरें, उन्नत एवं अधिक उपज देने वाली किस्में, बुआई का समय, बीज दर, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, कटाई, भंडारण और उत्पादन बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों की जानकारी यहां प्राप्त करें। सरसों की खेती के लिए विशेषज्ञ सलाह और नवीनतम कृषि अपडेट भी पढ़ें।
राई सरसों : सरसों वर्गीय सभी फसलें मुख्यतया वर्षा निर्भर क्षेत्रों में बोयी जाती हैं। ये फसलें मिट्टी से काफी गहराई से पानी प्राप्त कर सकती हैं। अत: इनकी उपज भूमि में संरक्षित नमी पर निर्भर करती हैं। परीक्षणों के
(विशेष प्रतिनिधि) भोपाल। प्रदेश में खरीफ फसलों की कटाई के बाद किसान अब रबी की तैयारी में जुट गए हैं। कृषि विभाग भी तैयारी में लगा हुआ है। म.प्र. में इस वर्ष रबी 2016-17 में 117 लाख 16 हजार हेक्टेयर
शाजापुर। कृषि विज्ञान केन्द्र, शाजापुर द्वारा ग्राम सुनेरा में प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक, डॉ. जी.आर. अम्बावतिया, डॉ. ए.के. मिश्रा, डॉ. एस.एस. धाकड़ व श्री एन.एस. खेड़कर के साथ-साथ 50 से अधिक
मृदा व उसकी तैयारी सरसों की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सर्वाधिक उपयुक्त होती है। भूमि का पी.एच. मान 7-8 के बीच अर्थात् उदासीन से हल्की क्षारीय मिट्टी सरसों की खेती के लिए अच्छा रहता है। सरसों की खेती