राज्य कृषि समाचार (State News)

ज्यादा बारिश हो या सूखा, सोयाबीन की फसल बचाएगी यह वैज्ञानिक तकनीक; मिलेगा बेहतर उत्पादन 

20 जून 2026, भोपाल: ज्यादा बारिश हो या सूखा, सोयाबीन की फसल बचाएगी यह वैज्ञानिक तकनीक; मिलेगा बेहतर उत्पादन – बदलते मौसम और वर्षा की अनिश्चितता के बीच कृषि विभाग किसानों को सोयाबीन की खेती में आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। खरीफ मौसम को देखते हुए किसानों को रेज्ड बेड फरो (Raised Bed Furrow) और ब्रॉड बेड फरो (Broad Bed Furrow) पद्धति से सोयाबीन की बुवाई करने की सलाह दी जा रही है। कृषि विभाग का मानना है कि ये तकनीकें अधिक वर्षा और अल्प वर्षा दोनों परिस्थितियों में फसल को सुरक्षित रखने के साथ बेहतर उत्पादन दिलाने में मददगार साबित हो सकती हैं।

किसानों को किया जा रहा जागरूक

कृषि विभाग के अधिकारियों और मैदानी अमले द्वारा गांव-गांव जाकर किसानों को इन तकनीकों के फायदे बताए जा रहे हैं। साथ ही खेतों पर प्रदर्शन के माध्यम से किसानों को समझाया जा रहा है कि रेज्ड बेड और ब्रॉड बेड फरो पद्धति किस प्रकार फसल की सुरक्षा और उत्पादन बढ़ाने में उपयोगी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय में मौसम का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कभी अत्यधिक बारिश तो कभी लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति किसानों के लिए चुनौती बन रही है। ऐसे में वैज्ञानिक पद्धति से बुवाई करना समय की जरूरत है।

ज्यादा बारिश में नहीं होगा जलभराव

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार रेज्ड बेड और ब्रॉड बेड फरो तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता बेहतर जल प्रबंधन है। अधिक वर्षा होने पर खेत में पानी जमा नहीं होता और अतिरिक्त पानी नालियों के माध्यम से आसानी से बाहर निकल जाता है। इससे फसल की जड़ों को नुकसान नहीं पहुंचता और पौधों का विकास सामान्य रूप से होता रहता है।

कम बारिश में भी मिलेगी नमी

अल्प वर्षा या सूखे जैसी स्थिति में भी यह तकनीक फसल के लिए लाभदायक साबित होती है। नालियों में नमी संरक्षित रहने के कारण पौधों को लंबे समय तक आवश्यक नमी मिलती रहती है। इससे फसल पर पानी की कमी का असर कम पड़ता है और उत्पादन प्रभावित नहीं होता।

प्रगतिशील किसान बने उदाहरण

भैरूंदा विकासखंड के एक प्रगतिशील किसान ने इस खरीफ सीजन में सोयाबीन की बुवाई रेज्ड बेड फरो पद्धति से की है। किसान का यह प्रयास अन्य कृषकों के लिए प्रेरणा बन रहा है। कृषि विभाग ऐसे सफल प्रयोगों को किसानों के बीच साझा कर रहा है ताकि अधिक से अधिक किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हों।

क्या है रेज्ड बेड और ब्रॉड बेड फरो पद्धति?

रेज्ड बेड फरो पद्धति में फसल की बुवाई ऊंची क्यारियों पर की जाती है तथा दोनों ओर नालियां बनाई जाती हैं। इससे अतिरिक्त पानी आसानी से निकल जाता है।

वहीं ब्रॉड बेड फरो पद्धति में चौड़ी क्यारियां और नालियां बनाई जाती हैं, जिससे जल प्रबंधन बेहतर होता है और पौधों की वृद्धि के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होता है।

उत्पादन बढ़ाने में मददगार तकनीक

कृषि विभाग के अनुसार इन तकनीकों को अपनाने से जलभराव से होने वाली फसल क्षति कम होती है, जड़ों का विकास बेहतर होता है और उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ती है। इसके अलावा सिंचाई जल की बचत होती है, रोग एवं कीट प्रकोप की संभावना कम रहती है तथा पौधों की समान वृद्धि होने से उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि की संभावना बढ़ जाती है।

कृषि विभाग की किसानों से अपील

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खरीफ मौसम में सोयाबीन की बुवाई वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार रेज्ड बेड फरो अथवा ब्रॉड बेड फरो पद्धति से करें। विभाग का कहना है कि इन तकनीकों को अपनाकर किसान बदलते मौसम की चुनौतियों का सामना करते हुए बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि कार्यालय या कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।

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