बारिश कम हुई तो क्या करें किसान? कृषि विशेषज्ञों ने बताए कारगर उपाय
08 जून 2026, रायपुर: बारिश कम हुई तो क्या करें किसान? कृषि विशेषज्ञों ने बताए कारगर उपाय – वर्ष 2026 के मानसून को लेकर जारी मौसम पूर्वानुमानों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देश में वर्षा दीर्घकालिक औसत का लगभग 90 प्रतिशत रहने की संभावना है। एल-नीनो के प्रभाव के कारण मानसून के सामान्य से कमजोर रहने और जून माह में भी अपेक्षाकृत कम बारिश होने के संकेत मिले हैं। ऐसे में कृषि विशेषज्ञ किसानों को जल संरक्षण आधारित वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
कतार बोनी से होगा नमी का बेहतर उपयोग
विशेषज्ञों का कहना है कि कम वर्षा की स्थिति में धान की सीड ड्रिल से कतार बोनी किसानों के लिए लाभकारी विकल्प साबित हो सकती है। इस पद्धति में बीज निर्धारित गहराई और समान दूरी पर बोए जाते हैं, जिससे अंकुरण बेहतर होता है और पौधों की जड़ें अधिक गहराई तक विकसित होती हैं।
मजबूत जड़ प्रणाली मिट्टी में उपलब्ध सीमित नमी का प्रभावी उपयोग करती है, जिससे सूखे जैसी परिस्थितियों में भी फसल को अपेक्षाकृत कम नुकसान होता है। इसके अलावा पौधों के बीच प्रतिस्पर्धा कम होने से पानी, पोषक तत्व और सूर्य प्रकाश का संतुलित उपयोग संभव हो पाता है।
खरपतवार नियंत्रण में भी मिलती है सुविधा
कतार बोनी पद्धति से निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण का कार्य आसान हो जाता है। समय पर खरपतवार प्रबंधन होने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है और फसल की वृद्धि बेहतर होती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक कम वर्षा वाले वर्षों में उत्पादन को स्थिर बनाए रखने में मददगार साबित हो सकती है।
नैनो डीएपी से जड़ों का विकास होगा बेहतर
कृषि विभाग किसानों को नैनो डीएपी के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित कर रहा है। नैनो डीएपी में मौजूद फास्फोरस के सूक्ष्म कण पौधों द्वारा आसानी से अवशोषित किए जाते हैं, जिससे जड़ों का विकास तेज होता है और फसल की प्रारंभिक वृद्धि बेहतर होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कम नमी की स्थिति में भी पौधे उपलब्ध पोषक तत्वों का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग कर पाते हैं, जिससे फसल की सेहत और उत्पादकता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की सलाह
कृषि विभाग ने किसानों से खरीफ 2026 में मेड़बंदी, वर्षा जल संरक्षण, खेतों में नमी संरक्षण तथा उपलब्ध जल के समुचित प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की अपील की है। इसके साथ ही नैनो डीएपी, नैनो यूरिया और जैव उर्वरकों के संतुलित उपयोग की भी सलाह दी गई है।
अधिकारियों का कहना है कि जल संरक्षण और वैज्ञानिक तकनीकों का समन्वित प्रयोग कम वर्षा की स्थिति में भी फसल उत्पादन को स्थिर और लाभकारी बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। किसानों को मौसम आधारित कृषि सलाह का नियमित रूप से पालन करते हुए समय पर कृषि कार्य करने की सलाह दी गई है।
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