Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

बानी में शुरू हुई अखरोट की तुड़ाई, 3 हजार परिवारों की आजीविका का सहारा

31 अगस्त 2026, कठुआ: बानी में शुरू हुई अखरोट की तुड़ाई, 3 हजार परिवारों की आजीविका का सहारा – जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के पहाड़ी क्षेत्र बानी में इन दिनों अखरोट की तुड़ाई का काम जोर पकड़ चुका है। गांवों में किसान और उनके परिवार सुबह से शाम तक अखरोट के बागों में मेहनत कर पेड़ों से पके फल उतार रहे हैं। क्षेत्र में लंबे समय से अखरोट की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। किसान पारंपरिक तरीके से इसकी खेती करते हैं और इसे प्राकृतिक कृषि से जुड़ा उत्पाद भी मानते हैं।

पेड़ों से अखरोट तोड़ने के बाद उनकी सफाई की जाती है। इसके बाद बाजार में भेजने से पहले इन्हें करीब पांच से छह दिन तक धूप में सुखाया जाता है। अच्छी तरह सूखने के बाद अखरोट को बिक्री के लिए बाजार भेज दिया जाता है। किसानों के लिए यह केवल एक मौसमी फसल नहीं, बल्कि पूरे साल की मेहनत और आय का महत्वपूर्ण जरिया है।

जिला बागवानी अधिकारी मोहम्मद शकील के अनुसार बानी क्षेत्र में करीब 3,000 परिवार अखरोट उत्पादन से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि अखरोट की बाजार में कीमत करीब तीन रुपये प्रति नग तक हो सकती है। हालांकि अखरोट के पेड़ को पूरी तरह विकसित होकर फल देने में कई वर्ष लगते हैं। एक बार पेड़ अच्छी तरह फल देने लगे तो एक मौसम में उससे करीब 15 हजार से 20 हजार रुपये तक की आय हो सकती है।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

चैंडलर किस्म को बढ़ावा

बागवानी विभाग क्षेत्र में अखरोट की बेहतर किस्मों को बढ़ावा देने पर भी जोर दे रहा है। अधिकारी के अनुसार विभाग पिछले दो वर्षों से ‘चैंडलर’ किस्म पर काम कर रहा है। इसे बेहतर गुणवत्ता वाली किस्म माना जाता है और इससे भविष्य में किसानों को बेहतर उत्पादन एवं आय की संभावना है।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

भाग का मानना है कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे, आधुनिक तकनीकी जानकारी और बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाए तो बानी में अखरोट उत्पादन का दायरा बढ़ाया जा सकता है। इससे क्षेत्र के हजारों परिवारों की आय में भी वृद्धि हो सकती है। यहां की बागवानी परंपरा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की सालभर की मेहनत से जुड़ी है। बेहतर किस्मों और बाजार व्यवस्था के साथ आने वाले वर्षों में क्षेत्र में अखरोट उत्पादन की संभावनाएं और मजबूत होने की उम्मीद है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture