राज्य कृषि समाचार (State News)

लोन जमा नहीं करने वाले किसानों के लिए यह राहत भरी खबर

28 जनवरी 2025, जयपुर: लोन जमा नहीं करने वाले किसानों के लिए यह राहत भरी खबर – जी हां ! राजस्थान के उन किसानों के लिए यह राहत भरी खबर होगी कि यदि किसी किसान ने बैंक से लोन लेने के बाद भी लोन जमा नहीं किया है तब भी ऐसे किसानों को नये सिरे से लोन दिया जा सकेगा। बता दें कि किसी न
किसी कारणवश कई किसान बैंक का  लोन नहीं चुका पाते है और ऐसे में बैंक ऐसे किसानों को डिफाल्टर घोषित कर देती है लेकिन राजस्थान की सरकार ने ऐसे किसानों को राहत देने का काम किया है।

राजस्थान के जालोर जिले के लिए अकृषि व कृषि ऋणी सदस्यों के लिए एकमुश्त समझौता योजना-2024 लागू की गई है जिसमें 31 मार्च, 2025 तक डिफॉल्टर ऋणी कृषक निर्धारित बकाया राशि जमा कराकर योजना का लाभ ले सकेंगे। दी जालोर सैण्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लि. जालोर के प्रबन्ध निदेशक नारायण सिंह ने बताया कि सहकारिता विभाग, राजस्थान जयपुर व शीर्ष सहकारी बैंक के निर्देशानुसार जालोर केंद्रीय सहकारी बैंक में कृषि-अकृषि व्यक्तिगत अवधिपार एवं एनपीए (गैर निष्पादित आस्तियां) में वर्गीकृत ऋणी सदस्यों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से कृषि-अकृषि एकमुश्त समझौता योजना-2024 लागू की गई है जिनमें ऐसे ऋणी सदस्य जिनके विरूद्ध बकाया ऋण राशि अवधिपार एवं 31 मार्च, 2023 को एनपीए (संदिग्ध एवं अशोध्य श्रेणी) में वर्गीकृत हो चुकी हैं, वे ऋणी सदस्य ऋण चुकाये जाने की कुल राशि का 25 प्रतिशत जमा करवाकर लागू की गई योजना का लाभ ऋण राशि चुकाये जाने की तिथि तक ऋण स्वीकृति पत्र में अंकित ब्याज दर अथवा 8 प्रतिशत ब्याज दर (जो कम है) साधारण दर से ब्याज वसूल किया जायेगा। योजना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कृषि-अकृषि एकमुश्त समझौता योजना-2024 का लाभ प्राप्त करने के इच्छुक पात्रता धारक ऋणी कृषक सदस्य क्षेत्र की जालोर केन्द्रीय सहकारी बैंक की नजदीकी शाखा के शाखा प्रबंधक अथवा क्षेत्रीय अधिकारी से संपर्क कर लागू योजना के अंतर्गत कृषक सदस्य के विरूद्ध वसूली योग्य चुकता राशि 25 प्रतिशत जमा कराकर कृषि-अकृषि एक मुश्त समझौता योजना-2024 में राहत राशि का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। योजना की अवधि 31 मार्च, 2025 रखी गई है। इस तिथि तक डिफॉल्टर ऋणी किसानों द्वारा एकमुश्त समझौता योजना के तहत लाभ नहीं लेने अथवा अपनी बकाया एनपीए/ओडी राशि जमा नहीं करवाने की स्थिति में बैंक द्वारा उनके विरूद्ध अधिनियम अंतर्गत कार्यवाही अमल में लाई जायेगी।

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