राज्य कृषि समाचार (State News)

इन ’भगवान’ को लगती है ठंड, इसलिए इन्हें नहलाते है गर्म पानी से

28 नवंबर 2024, भोपाल: इन ’भगवान’ को लगती है ठंड, इसलिए इन्हें नहलाते है गर्म पानी से – क्या भगवान को भी कभी ठंड या गर्मी लगती है. या फिर भगवान को बारिश का असर होता है. अमूमन इसका उत्तर लोगों से या तो नहीं में ही मिलेगा या फिर इन जैसे प्रश्नों को सुनकर लोग निरूत्तर भी हो जाते है. लेकिन भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक नगरी उज्जैन में भगवान महाकाल को ठंड के मौसम में गर्म पानी से स्नान कराया जाता है। हालांकि भगवान महाकाल को ठंड नहीं लगती है लेकिन महाकाल मंदिर में यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है कि ठंड के दिनों में भगवान महाकाल को गर्म पानी से ही स्नान कराया जाता है और वह भी तड़के चार बजे  …!

देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर का स्थान उज्जैन में है। महाकाल मंदिर में कई परंपराएं ऐसी है जो प्राचीन काल से ही निर्वहन की जाती है। इन्हीं में से एक परंपरा भगवान महाकाल को गर्म जल से स्नान कराने की भी है। मंदिर के पंडितों के अनुसार  महाकाल मंदिर की पूजन परंपरा में गर्मी व सर्दी के क्रम में प्रत्येक छह माह में भगवान की दिनचर्या बदलती है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से मंदिर में सर्दी की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन से भगवान महाकाल ठंडे के बजाय गर्म जल से स्नान करना प्रारंभ करते हैं। साथ ही आरती का समय भी बदलता है। महाकाल मंदिर में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी से भस्म आरती में बाबा महाकाल को गर्म जल से स्नान  कराने की शुरुआत  यह क्रम फाल्गुन पूर्णिमा तक जारी रहेगा। इसी दिन से राजाधिराज महाकाल को ठंडे पानी से स्नान कराने की शुरुआत कर दी जाएगी।

 मंदिर की महिमा का विभिन्न पुराणों में   वर्णन

उज्जयिनी के श्री महाकालेश्वर भारत में बारह प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं। महाकालेश्वर मंदिर की महिमा का विभिन्न पुराणों में विशद वर्णन किया गया है। कालिदास से शुरू करते हुए, कई संस्कृत कवियों ने इस मंदिर को भावनात्मक रूप से समृद्ध किया है।  महाकालेश्वर की मूर्ति दक्षिणमुखी होने के कारण दक्षिणामूर्ति मानी जाती है। यह एक अनूठी विशेषता है, जिसे तांत्रिक परंपरा द्वारा केवल 12 ज्योतिर्लिंगों में से महाकालेश्वर में पाया जाता है।   महाकाल मंदिर का पौराणिक महत्व भी है। इस मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव ने यहां दूषण नामक राक्षस का वध कर अपने भक्तों की रक्षा की थी, जिसके बाद भक्तों के निवेदन के बाद भोले बाबा यहां विराजमान हुए थे। यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से तीसरा ज्योतिर्लिंग है।

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