मध्यप्रदेश में कृषि शिक्षा की रीढ़ कमजोर
विश्वविद्यालयों में सैकड़ों पद खाली
शिक्षकों की कमी से पढ़ाई, अनुसंधान प्रभावित
लेखक: अतुल सक्सेना
26 अगस्त 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश में कृषि शिक्षा की रीढ़ कमजोर – प्रदेश में कृषि शिक्षा और अनुसंधान को आधुनिक बनाने के दावों के बीच कृषि शिक्षा गंभीर संकट से गुजर रही है। राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी, बुनियादी ढांचे का अभाव और प्रायोगिक प्रशिक्षण की अनदेखी मुख्य समस्याएं हैं, जिससे छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। राज्य में दो प्रमुख कृषि विश्वविद्यालय जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर और ग्वालियर में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय संचालित हैं। इनके अलावा कई सरकारी कॉलेज, कृषि विज्ञान केंद्र और निजी विश्वविद्यालय स्नातक व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भगवान भरोसे चल रहे हैं, शिक्षकों का भारी अकाल, स्वीकृत पद खाली पड़े हैं और पूरा शिक्षण कार्य केवल अतिथि विद्वानों के भरोसे चल रहा है। कृषकों की आर्थिक प्रगति कृषि शिक्षा, अनुसंधान, कृषि की उन्नत तकनीक पर निर्भर है और प्रदेश में कृषि शिक्षा व अनुसंधान प्रदेश के दोनों कृषि विश्वविद्यालयों पर निर्भर है लेकिन चिंता का विषय है कि दोनों कृषि वि.वि. शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं।
जनेकृविवि के तहत 8 कृषि, 2 उद्यानिकी, 1 एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग कॉलेज संचालित है। इसी के साथ ही 9 कृषि अनुसंधान केन्द्रों, 22 केवीके भी हैं। विश्वविद्यालय के वार्षिक प्रतिवेदन के मुताबिक संस्था में शिक्षकों के 496 पद स्वीकृत हैं जिसके विरुद्ध मात्र 209 पद भरे हैं।
विडम्बना यह है कि डीन के 7 एवं प्राध्यापक के 19 पद खाली पड़े हंै ऐसे में छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है अनुसंधान के तहत विश्वविद्यालय में कुल 136 स्वीकृत पदों में से मात्र 55 पद भरे हैं जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तो दूर फैकल्टी बंद करने की नौबत आ गई है। चालू वर्ष में जनेकृविवि के समस्त महाविद्यालयों की स्नातक कक्षाओं में लगभग 3200 विद्यार्थी एव पीजी कक्षाओं में लगभग 390 विद्यार्थी हैं और लगभग 90 विद्यार्थी पीएचडी कर रहे हैं।
इधर राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर और उससे संबद्ध महाविद्यालयों की स्थिति और भी चिंताजनक बनी हुई है। विश्वविद्यालय और इसके अधीन संचालित कालेजों में कुल स्वीकृत पदों में से 76 प्रतिशत पद रिक्त हैं। शिक्षकों की भारी कमी के कारण कृषि शिक्षा का व्यावहारिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है और अनुसंधान गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
वार्षिक रिपोर्ट एवं विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक सबसे गंभीर स्थिति सीहोर, ग्वालियर, सीधी, खंडवा और इंदौर कृषि महाविद्यालयों की है, जहां 80 प्रतिशत से अधिक फैकल्टी पद खाली हैं। कृषि शिक्षा में फील्ड वर्क, प्रयोगशाला प्रशिक्षण और शोध कार्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों को पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। हाल ही में सीहोर कृषि महाविद्यालय में शिक्षकों की कमी के कारण दो पीजी कोर्स स्थगित कर दिए गए हैं।
विश्वविद्यालय में प्रथम श्रेणी के 142 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें केवल 27 पदों पर ही नियुक्तियां हैं। इसी प्रकार द्वितीय श्रेणी में 315 पद स्वीकृत है इसमें मात्र 76 पद भरे हैं। इस प्रकार प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के 457 स्वीकृत पदों में केवल 103 पद भरे और 354 पद रिक्त हैं। ऐसे में विभागों का संचालन और अनुसंधान गतिविधियों का विस्तार दोनों चुनौती बने हुए हैं। चालू वर्ष में सिंधिया कृविवि के समस्त महाविद्यालयों की स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं में लगभग 2200 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
तस्वीर का दूसरा स्याह पहलू यह है कि ये विश्वविद्यालय अपने मौजूदा स्टाफ को बजट के अभाव में वेतन भी नहीं दे पा रहे हैं। अन्य प्रदेशों में विश्वविद्यालय के बजट की तुलना में मध्य प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों का बजट एक चौथाई मात्र है। आधुनिक कृषि तकनीकों, जैसे ड्रोन, डेटा एनालिटिक्स और स्मार्ट फार्मिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में ठीक से लागू नहीं हो पा रहा है। इसके चलते कृषि में डिग्री लेने के बाद भी छात्रों के लिए मजबूत कैंपस प्लेसमेंट और रोजगार के अवसर सीमित हैं। उक्त परिस्थतियों के मद्देनजर कृषि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में नियमित और स्थायी प्रोफेसरों के पदों को जल्द भरना होगा साथ ही प्रयोगशालाओं और अनुसंधान केंद्रों को आधुनिक बनाने की आवश्यकता है। मध्यप्रदेश में चल रहे कृषक कल्याण वर्ष में कृषि शिक्षा की उपेक्षा आने वाले वर्षों में प्रतिकूल परिणाम दे सकती है।
अपनी बेहाली पर आंसू बहाने वाले ये कृषि विश्वविद्यालय कभी देश में कृषि शिक्षा के शिखर तीर्थ होते थे, परन्तु अब रैंकिंग सूची में टॉप 50 में भी नहीं हैं।
| कृषि विश्वविद्यालय | पद स्वीकृत | पद भरे | पद खाली |
|---|---|---|---|
| जबलपुर | 496 | 209 | 287 |
| ग्वालियर | 457 | 103 | 354 |
प्रदेश में कृषि शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। कृषि विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों को शीघ्र भरा जायेगा, जिससे कृषि शिक्षा की उपयोगिता बढ़े तथा गुणवत्ता में सुधार हो।

कृषि मंत्री, म.प
कृषि शिक्षा की हालत दिनों-दिन दयनीय होती जा रही है। शासन को हस्तक्षेप कर योग्य प्राध्यापकों की भर्ती करनी चाहिए। केवल विश्वविद्यालय स्वयं के स्तर पर यह कार्य नहीं कर सकता, अन्यथा विश्वविद्यालय बंद हो जाएंगे। – डॉ. व्ही.एस. तोमर, पूर्व कुलपति ज.ने.कृ.वि.वि. , जबलपुर
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

