विदिशा में कृषि रोडमैप से बदलेगी खेती की तस्वीर, हर विकासखंड में 10 बीज ग्राम और 5 कस्टम हायरिंग सेंटर होंगे स्थापित
19 अगस्त 2026, विदिशा: विदिशा में कृषि रोडमैप से बदलेगी खेती की तस्वीर, हर विकासखंड में 10 बीज ग्राम और 5 कस्टम हायरिंग सेंटर होंगे स्थापित – मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में कृषि क्षेत्र को अधिक आधुनिक, तकनीक आधारित और लाभकारी बनाने के उद्देश्य से कृषि रोडमैप के अंतर्गत विभिन्न महत्वपूर्ण कार्य किए जाने प्रस्तावित हैं। इन कार्यों के माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक कृषि यंत्र, उन्नत तकनीक, सिंचाई सुविधाएं, कृषि आदानों की जांच तथा फसल उत्पादन के बाद उपज के सुरक्षित भंडारण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है।
कृषि रोडमैप के अंतर्गत जिले के प्रत्येक विकासखंड में 10-10 बीज ग्राम स्थापित किए जाएंगे। इन बीज ग्रामों के माध्यम से किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण एवं उन्नत बीज उपलब्ध कराने के साथ-साथ बीज उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे किसानों की गुणवत्तापूर्ण बीज के लिए बाहरी निर्भरता कम करने और कृषि उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इसी क्रम में प्रत्येक विकासखंड में 5 कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को महंगे कृषि यंत्र खरीदने के बजाय किराये पर आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध हो सकेंगे। इससे छोटे एवं सीमांत किसानों को भी आधुनिक कृषि तकनीक का लाभ मिलेगा तथा खेती की लागत और समय में कमी लाने में सहायता मिलेगी।
जिले में स्थापित होंगी उच्च गुणवत्ता वाली बागवानी नर्सरियां
उद्यानिकी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए जिले में 5 उच्च गुणवत्ता वाली बागवानी नर्सरियां स्थापित करने की योजना है। इन नर्सरियों से किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री उपलब्ध कराने के साथ फल, सब्जी एवं अन्य उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र विस्तार को प्रोत्साहन मिलेगा। कृषि रोडमैप के तहत जिले में उद्यानिकी फसलों का क्षेत्रफल 10 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
एक क्लस्टर बनेगा उच्च तकनीकी कृषि उत्कृष्टता केंद्र
जिले के एक क्लस्टर को उच्च तकनीकी कृषि उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इस केंद्र के माध्यम से आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत उत्पादन पद्धतियों, जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई तथा फसल प्रबंधन से संबंधित तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक और लाभकारी कृषि पद्धतियों से जोड़ना है।
मिट्टी, जल और कृषि आदानों की जांच की सुविधा
कृषकों को वैज्ञानिक कृषि सलाह उपलब्ध कराने के लिए जिला स्तर पर मिट्टी, जल तथा कृषि आदानों—बीज, उर्वरक एवं कीटनाशकों के परीक्षण हेतु प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी। इससे कृषि आदानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा मिट्टी और जल की स्थिति के अनुरूप फसल एवं उर्वरक प्रबंधन की सलाह देने में मदद मिलेगी।
दलहन एवं तिलहन उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
कृषि रोडमैप में जिले में दलहन एवं तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया है। किसानों को इन फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे फसल विविधीकरण के साथ किसानों की आय में वृद्धि के अवसर बढ़ेंगे।
31 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में प्रेशराइज्ड सिंचाई व्यवस्था
जिले के 84 ग्रामों में लगभग 31 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में प्रेशराइज्ड सिंचाई व्यवस्था प्रारंभ की गई है। इस कार्य को आगामी 3 से 5 वर्षों में पूर्ण किए जाने का लक्ष्य है। प्रेशराइज्ड सिंचाई व्यवस्था से पानी का अधिक दक्षता से उपयोग किया जा सकेगा तथा किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी। इसके साथ ही उद्यानिकी फसलों में ड्रिप इरिगेशन को बढ़ावा दिया जाएगा।
प्रत्येक विकासखंड में कोल्ड चेन स्टोर/पैक हाउस
शीघ्र क्षय होने वाले कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों के संरक्षण तथा किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक विकासखंड में एक कोल्ड चेन स्टोर/पैक हाउस स्थापित किया जाएगा। इससे फल, सब्जी एवं अन्य नाशवान उत्पादों को सुरक्षित रखने, उनकी गुणवत्ता बनाए रखने और कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।
किसानों की क्षमता वृद्धि पर जोर
कृषि रोडमैप के तहत किसानों की क्षमता निर्माण के लिए नियमित प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे। इनमें आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक उपयोग, कीट एवं रोग प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई, उद्यानिकी तथा कृषि उत्पादों के बेहतर प्रबंधन से संबंधित जानकारी दी जाएगी।
2 एफपीओ को पूर्ण रूप से किया जाएगा सशक्त
कृषकों को संगठित कर उनकी सामूहिक क्रय-विक्रय क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से जिले में दो किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को पूर्ण रूप से विकसित एवं सशक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। एफपीओ के माध्यम से किसानों को कृषि आदानों की सामूहिक खरीद, उत्पादन के बेहतर प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और बाजार तक सीधी पहुंच के अवसर मिल सकेंगे।
कृषि रोडमैप के इन कार्यों का प्रमुख उद्देश्य जिले की कृषि को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर तकनीक आधारित, संसाधन दक्ष, बाजारोन्मुख और अधिक लाभकारी कृषि व्यवस्था के रूप में विकसित करना है। बीज ग्राम, कस्टम हायरिंग केंद्र, उच्च तकनीकी कृषि उत्कृष्टता केंद्र, परीक्षण प्रयोगशाला, प्रेशराइज्ड सिंचाई, कोल्ड चेन तथा एफपीओ जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से किसानों को खेती के विभिन्न चरणों में आवश्यक सुविधाएं एकीकृत रूप से उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
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