मूंग छोड़ उड़द की खेती अपनाई, एक हेक्टेयर में किसान ने कमाया 63,750 रुपये का मुनाफा; जानिए सफलता का राज
08 जुलाई 2026, विदिशा: मूंग छोड़ उड़द की खेती अपनाई, एक हेक्टेयर में किसान ने कमाया 63,750 रुपये का मुनाफा; जानिए सफलता का राज – मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में फसल विविधीकरण अपनाकर एक किसान ने कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने की मिसाल पेश की है। विकासखंड नटेरन की ग्राम पंचायत साढ़ेर के प्रगतिशील किसान वीरेंद्र सिंह जाट ने पारंपरिक ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती छोड़कर उन्नत किस्म की उड़द और मक्के की खेती अपनाई। इसका परिणाम यह रहा कि केवल एक हेक्टेयर में उड़द की खेती से उन्हें 63,750 रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। वहीं, सीमित क्षेत्र में मक्के की खेती से भी अच्छी आमदनी हासिल कर उन्होंने फसल विविधीकरण की उपयोगिता साबित की।
जिला कलेक्टर अंशुल गुप्ता के निर्देशन में जिले में कृषि नवाचार और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि विभाग के अनुसार इन प्रयासों का सकारात्मक असर अब किसानों की आय में भी दिखाई देने लगा है।
कृषि विभाग की सलाह से बदली खेती
किसान वीरेंद्र सिंह जाट पिछले कई वर्षों से ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती कर रहे थे, लेकिन पिछले दो वर्षों से उत्पादन लगातार घट रहा था। इस दौरान कृषि विभाग के क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारी अनिल बघेल ने नियमित खेत भ्रमण के दौरान उन्हें ग्रीष्मकालीन उड़द की उन्नत किस्म आईपीयू-13-1 (IPU-13-1) लगाने की सलाह दी। विभाग ने एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए उन्नत बीज भी उपलब्ध कराया।
कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में किसान ने मार्च-अप्रैल के दौरान एक हेक्टेयर में उड़द की बुवाई की और वैज्ञानिक खेती की तकनीकों के साथ स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति अपनाई।
30 हजार की लागत, 63,750 रुपये का शुद्ध लाभ
उड़द की खेती पर किसान का कुल खर्च लगभग 30 हजार रुपये आया। वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने पर उन्हें 12.5 क्विंटल उड़द का उत्पादन मिला। बाजार में 7,500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिक्री करने पर कुल 93,750 रुपये की आय हुई। सभी खर्च निकालने के बाद किसान को 63,750 रुपये का शुद्ध मुनाफा मिला, जो पारंपरिक फसलों की तुलना में कहीं अधिक लाभदायक साबित हुआ।
मक्के से भी हुई अच्छी कमाई
वीरेंद्र सिंह जाट ने फसल विविधीकरण के तहत करीब एक बीघा (लगभग 0.2 हेक्टेयर) क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन मक्के की खेती भी की। इस फसल पर लगभग 2 हजार रुपये की लागत आई। तैयार भुट्टों की बिक्री से उन्हें 10 हजार रुपये प्राप्त हुए और 8 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। सीमित क्षेत्र में मक्के की खेती से लगभग 400 प्रतिशत तक लाभ मिलने से यह प्रयोग अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक बन गया।
किसान वीरेंद्र सिंह जाट अपनी सफलता का श्रेय कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन, उन्नत बीजों के चयन और आधुनिक कृषि तकनीकों को देते हैं। उनका कहना है कि फसल विविधीकरण अपनाने से न केवल आय बढ़ती है, बल्कि मौसम और बाजार से जुड़े जोखिम भी कम हो जाते हैं। उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीकों और उन्नत किस्मों को अपनाने की अपील की।
कृषि विभाग ने किसानों से की यह अपील
कृषि विभाग ने जिले के किसानों से वैज्ञानिक खेती, उन्नत बीजों के उपयोग, सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों और फसल विविधीकरण अपनाने का आग्रह किया है। विभाग का कहना है कि बदलती जलवायु और बाजार की परिस्थितियों में फसल विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी विकल्प बन सकता है।
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