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राज्य कृषि समाचार (State News)

मूंग छोड़ अपनाई मूंगफली की खेती, सागर के किसान को मिला प्रति एकड़ 12 क्विंटल तक उत्पादन; बढ़ा मुनाफा

01 जुलाई 2026, भोपाल: मूंग छोड़ अपनाई मूंगफली की खेती, सागर के किसान को मिला प्रति एकड़ 12 क्विंटल तक उत्पादन; बढ़ा मुनाफा – मध्यप्रदेश के सागर जिले के शाहपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत देवरी पथरिया के शिक्षित युवा किसान बरसात सिंह राजपूत ने खेती में बदलाव कर सफलता की नई मिसाल पेश की है। कई वर्षों तक जायद सीजन में मूंग की खेती करने वाले किसान ने इस बार कृषि विभाग की सलाह पर ग्रीष्मकालीन मूंगफली की खेती अपनाई। वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक खेती के तरीकों की मदद से उन्हें प्रति एकड़ 10 से 12 क्विंटल तक उत्पादन मिला, जिससे उनकी आय और मुनाफे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।

कृषि विभाग से मिला मुफ्त बीज, आधुनिक तरीके से की खेती

बरसात सिंह राजपूत ने कृषि विभाग द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराए गए जीजी-37 (सोरथ गौरव) किस्म के 30 किलोग्राम बीज की एक एकड़ में बुवाई की। खेत की तैयारी के लिए रबी फसल की नरवाई को रोटावेटर से मिट्टी में मिलाया गया। इसके बाद गोबर की खाद, संतुलित उर्वरकों और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली का उपयोग करते हुए वैज्ञानिक तरीके से फसल तैयार की गई।

90 से 100 दिन में तैयार हुई फसल

समय पर बुवाई और उचित फसल प्रबंधन का परिणाम यह रहा कि मूंगफली की फसल 90 से 100 दिनों में तैयार हो गई। किसान को प्रति एकड़ लगभग 10 से 12 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। बेहतर उत्पादन के कारण उन्हें पारंपरिक फसल की तुलना में अधिक लाभ मिला।

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नहीं करना पड़ा कीटनाशकों का इस्तेमाल

बरसात सिंह राजपूत ने बताया कि समय पर बुवाई होने के कारण फसल बारिश शुरू होने से पहले ही तैयार हो गई। पूरे फसल चक्र के दौरान किसी प्रकार का रोग या कीट प्रकोप नहीं हुआ, इसलिए रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग भी नहीं करना पड़ा। इससे उच्च गुणवत्ता वाली मूंगफली का उत्पादन प्राप्त हुआ और उत्पादन लागत भी कम रही।

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पहली बार किसानों को दिया गया था इस किस्म का बीज

कृषि विस्तार अधिकारी कुलदीप क्रिश्चियन ने बताया कि ग्राम पंचायत देवरी पथरिया के किसानों को पहली बार ग्रीष्मकालीन मूंगफली की खेती के लिए जीजी-37 (सोरथ गौरव) किस्म का निःशुल्क बीज उपलब्ध कराया गया था। किसानों ने विभाग के मार्गदर्शन में समय पर बुवाई की और वैज्ञानिक खेती की तकनीकों को अपनाया, जिससे उन्हें उत्कृष्ट उत्पादन मिला।

कृषि विभाग के अनुसार, शाहपुर क्षेत्र की भूमि और जलवायु ग्रीष्मकालीन मूंगफली की खेती के लिए बेहद अनुकूल है। ऐसे में किसान यदि वैज्ञानिक तकनीकों के साथ इस फसल को अपनाते हैं तो कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं।

दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा

बरसात सिंह राजपूत की सफलता अब आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। कृषि विभाग का मानना है कि यदि अधिक किसान ग्रीष्मकालीन मूंगफली की वैज्ञानिक खेती अपनाते हैं, तो क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

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