राज्य कृषि समाचार (State News)

2 भैंसों से शुरू किया सफर, आज 175 लीटर दूध बेचकर हर महीने कमा रहे 3 लाख रुपये

वैज्ञानिक पशुपालन और मेहनत के दम पर लखपत यादव ने खड़ा किया सफल डेयरी व्यवसाय, ग्रामीण युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत

22 जून 2026, भोपाल: 2 भैंसों से शुरू किया सफर, आज 175 लीटर दूध बेचकर हर महीने कमा रहे 3 लाख रुपये – मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के शमशाबाद विकासखंड के ग्राम वेरखेड़ी घाट निवासी किसान लखपत यादव ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत, लगन और सही दिशा में किए गए प्रयासों से सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। लगभग एक दशक पहले केवल 1-2 भैंसों के साथ शुरू किया गया उनका पशुपालन व्यवसाय आज एक बड़े डेयरी फार्म का रूप ले चुका है। वर्तमान में वे प्रतिदिन करीब 175 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं और हर महीने लगभग 3 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।

खेती के साथ शुरू किया पशुपालन

लखपत यादव ने केवल 9वीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की है, लेकिन उनकी सोच और कार्यशैली किसी सफल उद्यमी से कम नहीं है। लगभग 30 बीघा कृषि भूमि के मालिक लखपत ने खेती के साथ-साथ पशुपालन को अतिरिक्त आय के स्रोत के रूप में शुरू किया था। उस समय उनके पास केवल 1-2 भैंसें थीं और आर्थिक संसाधन भी सीमित थे। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे पशुपालन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया।

विभागीय योजनाओं का उठाया लाभ

पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं का लाभ लेकर लखपत यादव ने अपने पशुधन की गुणवत्ता में लगातार सुधार किया। कृत्रिम गर्भाधान, नियमित टीकाकरण और तकनीकी मार्गदर्शन जैसी सेवाओं ने उनके डेयरी व्यवसाय को नई दिशा दी। वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने से पशुओं की नस्ल और स्वास्थ्य दोनों बेहतर हुए, जिसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ा।

आज फार्म में हैं 58 से अधिक पशु

निरंतर प्रयासों और बेहतर प्रबंधन के चलते आज उनके डेयरी फार्म में 25 मुर्रा भैंसें, 23 पड़ियाएं, 5 एचएफ गायें और 5 बछियाएं हैं। यह उपलब्धि दर्शाती है कि योजनाबद्ध तरीके से किया गया पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

संतुलित आहार और हरे चारे पर विशेष ध्यान

लखपत यादव अपने पशुओं के पोषण और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। वे पशुओं को चुनी, दलिया, तारा फीड और तिवाना जैसे पौष्टिक आहार उपलब्ध कराते हैं। इसके साथ ही हरे चारे की जरूरत पूरी करने के लिए अपने खेतों में बरसीम और गेहूं की खेती भी करते हैं। संतुलित आहार और बेहतर देखभाल के कारण उनके पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध उत्पादन में निरंतर वृद्धि हो रही है।

प्रतिदिन 175 लीटर दूध का उत्पादन

बेहतर प्रबंधन का परिणाम है कि उनके फार्म से प्रतिदिन लगभग 175 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। उत्पादित दूध को वे विदिशा स्थित सुंदर डेयरी को बेचते हैं, जहां उन्हें औसतन 60 रुपये प्रति लीटर का मूल्य मिलता है। इससे उन्हें हर महीने करीब 3 लाख रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है।

विस्तार की तैयारी में जुटे किसान

अपने डेयरी व्यवसाय को और अधिक विकसित करने के लिए लखपत यादव ने कामधेनु योजना और मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के अंतर्गत आवेदन भी किया है। उनका उद्देश्य पशुओं की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ दूध उत्पादन में और वृद्धि करना है, ताकि वे आधुनिक डेयरी उद्यम के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत कर सकें।

किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा

लखपत यादव की सफलता की कहानी ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने साबित किया है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाएं, तो कम संसाधनों से शुरू किया गया कार्य भी बड़े और लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है। उनकी उपलब्धि न केवल उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता की कहानी है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में भी एक सकारात्मक संदेश देती है।

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