राज्य कृषि समाचार (State News)

30 हजार के कर्ज से शुरू की जैविक खेती, एक सीजन में 75 हजार की सब्जी बेचकर आत्मनिर्भर बनीं उर्मिला  

10 सितंबर 2026, भोपाल: 30 हजार के कर्ज से शुरू की जैविक खेती, एक सीजन में 75 हजार की सब्जी बेचकर आत्मनिर्भर बनीं उर्मिला – मध्यप्रदेश के सीधी जिले के मझौली विकासखंड की ग्राम पंचायत पांड की रहने वाली उर्मिला सिंह के लिए खेती पहले परिवार की जरूरतें पूरी करने का जरिया थी। घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित उनका जीवन तब बदला, जब वह ग्रामीण आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। कृषि के प्रति रुचि और कुछ नया करने की इच्छा ने उन्हें खेती को व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया। आज उर्मिला जैविक सब्जी उत्पादन के जरिए आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और लखपति दीदी की श्रेणी में शामिल हैं।

उर्मिला को एकीकृत कृषि संकुल क्रमांक-2, पांड से जोड़ा गया। कृषि सखी के माध्यम से उन्हें आधुनिक एवं नवीन कृषि तकनीकों, जैविक खाद और जैविक कीटनाशकों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण मिला। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने खेती की नई तकनीकों को सीखा और इसे व्यावसायिक स्तर पर अपनाने का फैसला किया।

30 हजार रुपये के ऋण से शुरू किया सब्जी उत्पादन

उर्मिला ने अपने एक एकड़ खेत में व्यावसायिक सब्जी उत्पादन शुरू किया। इसके लिए उन्होंने स्व-सहायता समूह के माध्यम से 30 हजार रुपये का ऋण लिया और अच्छी गुणवत्ता वाले बीज खरीदे। उन्होंने जैविक संसाधन केंद्र से केंचुआ खाद और जैविक कीटनाशक प्राप्त किए और उनका इस्तेमाल अपनी फसलों में किया। मौसम के अनुसार अलग-अलग सब्जियों की खेती करते हुए उन्होंने उत्पादन और बिक्री का सिलसिला लगातार जारी रखा। उर्मिला अपनी उपज को स्थानीय हाट और साप्ताहिक बाजार में सीधे बेचती हैं। इससे उन्हें अपनी सब्जियों का बेहतर दाम मिला और खेती से होने वाली आमदनी में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हुई।

एक सीजन में 75 हजार रुपये की सब्जी बेची

उर्मिला की मेहनत का असर उनकी कमाई में भी दिखाई दिया। पिछले सीजन में उन्होंने करीब 75 हजार रुपये की सब्जियों की बिक्री की। लगातार मौसमी सब्जियों का उत्पादन और स्थानीय बाजार में सीधे बिक्री से उनकी आय बढ़ती गई।खेती से होने वाली आमदनी ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया। इसी के चलते आज वह लखपति दीदी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।

यूरिया का नहीं करतीं इस्तेमाल

उर्मिला बताती हैं कि वह अपने खेत में तैयार होने वाली सब्जियों में यूरिया का इस्तेमाल नहीं करतीं। फसल तैयार करने के लिए जैविक खाद और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करती हैं। उनका कहना है कि जैविक खेती के जरिए खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ गुणवत्तापूर्ण सब्जियों का उत्पादन किया जा सकता है।

‘मुझे अपने पैरों पर खड़ा होने का रास्ता मिला’

उर्मिला अपनी सफलता का श्रेय ग्रामीण आजीविका मिशन, स्व-सहायता समूह, कृषि सखी और एकीकृत कृषि संकुल को देती हैं। उनका कहना है कि सही समय पर प्रशिक्षण, समूह से आर्थिक सहयोग और जैविक संसाधनों की उपलब्धता ने उन्हें खेती को व्यवसाय के रूप में अपनाने में मदद की। वह आसपास की महिलाओं और किसानों से भी स्व-सहायता समूह और कृषि संकुल से जुड़ने की अपील करती हैं। उनका मानना है कि प्रशिक्षण लेने, समूह के माध्यम से आर्थिक सहयोग प्राप्त करने और जैविक संसाधनों का उपयोग कर व्यावसायिक सब्जी उत्पादन अपनाने से ग्रामीण परिवार अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

उर्मिला की कहानी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल है। स्व-सहायता समूह से मिला अवसर, खेती का प्रशिक्षण और लगातार मेहनत ने उन्हें घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित महिला से एक सफल कृषि उद्यमी बना दिया। आज वह अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा करने में सक्षम हैं और आसपास की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। उनकी सफलता बताती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं खेती को व्यवसाय बनाकर अपनी आय बढ़ाने के साथ परिवार के जीवन स्तर में भी सुधार ला सकती हैं।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture