इंदौर में 93% रकबे में हुई सोयाबीन की बोनी, अच्छी बारिश से खरीफ फसलों की बढ़िया स्थिति
18 जुलाई 2026, इंदौर: इंदौर में 93% रकबे में हुई सोयाबीन की बोनी, अच्छी बारिश से खरीफ फसलों की बढ़िया स्थिति – मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में खरीफ सीजन के दौरान कुल 2,52,150 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों की बोनी की गई है। इसमें सर्वाधिक 2,33,700 हेक्टेयर यानि लगभग 93 प्रतिशत क्षेत्र में सोयाबीन की खेती की गई है। वर्तमान में जिले की खरीफ फसलों की स्थिति संतोषजनक एवं अच्छी है। किसान फसलों में खरपतवार नियंत्रण तथा नमी संरक्षण के लिए डोरा चलाने एवं अन्य अंतरवर्ती कृषि कार्य कर रहे हैं।
जिले में इस वर्ष 17 जुलाई 2026 तक 13.9 इंच वर्षा दर्ज की गई है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि तक केवल 7.2 इंच औसत वर्षा हुई थी। इस प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष लगभग दोगुनी वर्षा होने से खरीफ फसलों को पर्याप्त लाभ मिला है।
किसानों ने ई-टोकन से उठाया उर्वरक
उप संचालक कृषि ने बताया कि कृषकों को ई-विकास प्रणाली के माध्यम से उर्वरकों का वितरण निरंतर किया जा रहा है। खरीफ फसलों के लिए किसानों द्वारा 34,737 ई-टोकन के माध्यम से 19,873 मीट्रिक टन उर्वरक का उठाव किया गया है। साथ ही आगामी रबी सीजन की तैयारी के लिए भी किसान उर्वरकों का भंडारण कर रहे हैं। जिले में वर्तमान में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं। उपलब्ध भंडार में यूरिया 6,475 मीट्रिक टन, डीएपी 406 मीट्रिक टन, एनपीके 2,697 मीट्रिक टन, एसएसपी 4,699 मीट्रिक टन तथा पोटाश (एमओपी) 662 मीट्रिक टन शामिल है। इस प्रकार जिले में कुल 14,940 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है।
कृषि विभाग ने किसानों को दी यह सलाह
कृषि विभाग द्वारा किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसलों में समय-समय पर निंदाई-गुड़ाई, डोरा चलाने सहित अन्य अंतरवर्ती कृषि क्रियाएं अवश्य करें। इससे खरपतवार नियंत्रण के साथ-साथ वर्षा में अंतराल की स्थिति में खेतों में नमी का संरक्षण होगा और पौधों को आवश्यक जल उपलब्ध हो सकेगा। जिन क्षेत्रों की हल्की भूमि में फसलें मुरझाने लगी हैं, वहां किसान मिनी स्प्रिंकलर के माध्यम से हल्की जीवन रक्षक सिंचाई करें।
यदि किसी क्षेत्र में फसलों पर कीट अथवा रोग का प्रकोप दिखाई दे तो किसान तत्काल अपने क्षेत्र के कृषि विस्तार अधिकारी अथवा वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर आवश्यक तकनीकी सलाह प्राप्त करें तथा वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार कीट एवं रोग नियंत्रण के उपाय अपनाएं।
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