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राज्य कृषि समाचार (State News)

नीमच में सामान्य से 20-25% कम बारिश, किसानों को फसल में नमी बचाने की सलाह

09 सितंबर 2026, नीमच: नीमच में सामान्य से 20-25% कम बारिश, किसानों को फसल में नमी बचाने की सलाह – मध्यप्रदेश के नीमच जिले में वर्तमान मानसून अवधि के दौरान अब तक सामान्य से करीब 20 से 25 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश की कमी को देखते हुए फसलों में नमी की स्थिति पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। कृषि विज्ञान केंद्र नीमच ने किसानों को घबराने के बजाय खेत और फसल की नियमित निगरानी करने तथा उपलब्ध नमी को बचाने की सलाह दी है।

कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार, सोयाबीन, मक्का, मूंगफली सहित अन्य फसलों में इस समय नमी की कमी होने से उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। सिंचाई की सुविधा वाले किसानों को उपलब्ध पानी का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर उन फसलों में करने की सलाह दी गई है, जहां इसकी ज्यादा जरूरत है। वहीं, जिन खेतों में पर्याप्त नमी है, वहां अनावश्यक सिंचाई नहीं करने को कहा गया है।

कम बारिश में कीट-रोगों पर रखें नजर

कम वर्षा की स्थिति में फसलों में कीटों का प्रकोप बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में किसानों को नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करने की सलाह दी गई है। किसी कीट या रोग का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर से अधिक पाए जाने पर ही कृषि विशेषज्ञ की सलाह से अनुशंसित कृषि रसायनों का इस्तेमाल करें।

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सोयाबीन में सेमीलूपर और गर्डल बीटल

सोयाबीन में सेमीलूपर और गर्डल बीटल का प्रकोप दिखाई देने पर नियंत्रण के लिए इनमें से किसी अनुशंसित विकल्प का उपयोग किया जा सकता है-

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  • क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी — 150 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर।
  • बीटा सायफ्लुथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड — 350 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर।
  • थायोमिथॉक्सम + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन — 125 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर।

सोयाबीन और उड़द में पीला मोजेक

सोयाबीन और उड़द में पीला मोजेक रोग दिखाई देने पर रसचूसक कीट और सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए—

  • डाईमिथोएट 30 प्रतिशत ईसी — 750 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर, या
  • इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल — 200 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

मक्का में फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप

मक्का में फॉल आर्मीवर्म या इल्ली का प्रकोप दिखाई देने पर—

  • इमामेक्टिन बेंजोएट — 220 ग्राम प्रति हेक्टेयर, या
  • क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन — 200 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव किया जा सकता है।

मूंगफली की फसल के लिए भी सला

मूंगफली में सफेद लट के नियंत्रण के लिए क्लोथियानीडीन 50 प्रतिशत डब्ल्यूडीजी की 250 ग्राम मात्रा को 1000 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रेंचिंग करने की सलाह दी गई है। मूंगफली में रोग नियंत्रण के लिए टेबुकोनाजोल + सल्फर के पूर्व मिश्रित उत्पाद की 1 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव किया जा सकता है।

लक्षण दिखने पर पहले कराएं सही पहचान

कृषि विज्ञान केंद्र नीमच के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. सी.पी. पचौरी ने किसानों से अपील की है कि फसल में किसी भी कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर पहले उसकी सही पहचान कराएं। इसके बाद ही कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार अनुशंसित कृषि रसायन का प्रयोग करें। कम बारिश की स्थिति में फसल में उपलब्ध नमी का संरक्षण, जरूरत के अनुसार सिंचाई और समय पर कीट-रोग की पहचान से फसल को नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है।

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