बिहार में तालाबों पर लगेंगे सोलर पैनल, नीचे जारी रहेगा मछली पालन
‘ऊपर बिजली, नीचे मछली’ योजना का छह और जिलों में विस्तार करने की तैयारी, बिजली खर्च में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी आने की उम्मीद
23 अक्टूबर 2026, पटना: बिहार में तालाबों पर लगेंगे सोलर पैनल, नीचे जारी रहेगा मछली पालन – बिहार में अब एक ही तालाब से बिजली उत्पादन और मछली पालन को बढ़ावा देने की तैयारी है। राज्य सरकार की ‘ऊपर बिजली, नीचे मछली’ योजना के तहत तालाबों और जलाशयों की सतह पर तैरते हुए सौर पैनल लगाए जाएंगे, जबकि पानी में मछली पालन पहले की तरह जारी रखा जा सकेगा। दरभंगा और सुपौल में पायलट परियोजना के बाद अब इस मॉडल को छह और जिलों में लागू करने की योजना है। इससे मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करने की संभावनाएं हैं।
एक ही जलाशय से आय के दो अवसर
योजना का मुख्य उद्देश्य जलाशयों का एक साथ दो कार्यों के लिए उपयोग करना है। इसके तहत पानी की सतह पर तैरने वाले सौर पैनल स्थापित किए जाएंगे, जिनसे बिजली पैदा होगी। वहीं, जलाशय में वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन भी किया जाएगा। इस व्यवस्था से जल क्षेत्र का बेहतर उपयोग होने के साथ बिजली उत्पादन और मत्स्य पालन से आय के दो स्रोत विकसित हो सकेंगे।
बिजली खर्च घटाने में मिलेगी मदद
मछली पालन में पानी के भीतर पर्याप्त ऑक्सीजन बनाए रखना जरूरी होता है। इसके लिए एयररेटर और अन्य उपकरण चलाने पड़ते हैं, जिनमें बिजली की खपत होती है। सौर ऊर्जा उपलब्ध होने से इन उपकरणों को चलाने के लिए बाहरी बिजली पर निर्भरता कम की जा सकती है।
योजना से जुड़े अनुमान के अनुसार, सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से बिजली खर्च और उत्पादन लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है। हालांकि, वास्तविक बचत तालाब के आकार, सौर संयंत्र की क्षमता, उपकरणों की बिजली खपत और संचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगी।
मत्स्य पालकों को मिलेगा अतिरिक्त लाभ
इस मॉडल से मछली पालन करने वाले किसानों को ऊर्जा लागत कम करने और उपलब्ध जल क्षेत्र का बेहतर उपयोग करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए सौर पैनलों की स्थापना इस तरह करना जरूरी होगा कि मछलियों के लिए पानी में पर्याप्त प्रकाश और अनुकूल पर्यावरण बना रहे। साथ ही, जल की गुणवत्ता, ऑक्सीजन स्तर और मछलियों की प्रजातियों को ध्यान में रखकर तकनीकी व्यवस्था तैयार करनी होगी।
यदि योजना का विस्तार सफलतापूर्वक होता है, तो बिहार में मत्स्य पालन और सौर ऊर्जा उत्पादन को जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। इससे किसानों और मत्स्य पालकों को पारंपरिक गतिविधियों के साथ ऊर्जा उत्पादन से जुड़ने का अवसर भी मिल सकता है।
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