प्रमुख जलाशयों में 24.5% घटा जल भंडार, रबी फसलों की बुवाई पर असर की आशंका
23 अक्टूबर 2026, भोपाल: प्रमुख जलाशयों में 24.5% घटा जल भंडार, रबी फसलों की बुवाई पर असर की आशंका – देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का भंडार पिछले साल की तुलना में काफी कम हो गया है। केंद्रीय जल आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश के 178 प्रमुख जलाशयों में उपलब्ध जल भंडारण पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 24.5 प्रतिशत कम है। वहीं, इन जलाशयों में पानी की मात्रा पिछले 10 वर्षों के सामान्य स्तर से भी नीचे बनी हुई है। दक्षिण भारत के जलाशयों में भंडारण की स्थिति सबसे कमजोर है। दूसरी ओर, रबी फसलों की बुवाई की रफ्तार भी पिछले साल की तुलना में धीमी चल रही है। ऐसे में जल भंडारण में कमी का असर आगामी कृषि सीजन पर पड़ने की आशंका है।
178 जलाशयों में 126.717 अरब घन मीटर पानी
केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की 15 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 178 प्रमुख जलाशयों में कुल 126.717 अरब घन मीटर (बीसीएम) पानी उपलब्ध है। यह इन जलाशयों की कुल उपयोगी भंडारण क्षमता का 68.58 प्रतिशत है।
पिछले साल इसी अवधि में इन जलाशयों में 167.910 अरब घन मीटर पानी उपलब्ध था, जबकि पिछले 10 वर्षों का सामान्य भंडारण स्तर 151.647 अरब घन मीटर रहा है। इस तरह मौजूदा जल भंडारण पिछले साल की समान अवधि के स्तर का 75.47 प्रतिशत और सामान्य भंडारण का 83.56 प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार, जलाशयों में पानी का भंडार पिछले साल के मुकाबले करीब 24.5 प्रतिशत और सामान्य स्तर से लगभग 16.4 प्रतिशत कम है।
रबी फसलों की बुवाई पर पड़ सकता है असर
जलाशयों में पानी की उपलब्धता का कृषि गतिविधियों से सीधा संबंध है। रबी सीजन में गेहूं, चना, सरसों और अन्य फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। ऐसे में जल भंडारण कम रहने से सिंचाई पर निर्भर क्षेत्रों में किसानों की चिंता बढ़ सकती है। हालांकि, फसलों पर इसका वास्तविक असर स्थानीय वर्षा, मिट्टी में नमी, भूजल की उपलब्धता और सिंचाई सुविधाओं पर भी निर्भर करेगा।
रबी फसलों की बुवाई की रफ्तार पिछले साल की तुलना में धीमी रहने के बीच जलाशयों में कम पानी की स्थिति कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में जल उपलब्धता और मौसम की परिस्थितियां फसलों की बुवाई तथा सिंचाई की जरूरतों को प्रभावित कर सकती हैं।
दक्षिण भारत में जल भंडारण की स्थिति कमजोर
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण भारत के जलाशयों में पानी का भंडार सबसे कमजोर बना हुआ है। इस क्षेत्र में जल उपलब्धता की स्थिति का असर सिंचाई और अन्य जरूरतों पर पड़ सकता है। जलाशयों में पानी की मात्रा पिछले साल और सामान्य स्तर से कम होने के कारण उपलब्ध संसाधनों का संतुलित उपयोग महत्वपूर्ण हो गया है। कुल मिलाकर, देश के प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण की मौजूदा स्थिति कृषि और जल प्रबंधन के लिहाज से चिंता का विषय है। रबी सीजन में सिंचाई की मांग बढ़ने के साथ जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और उपलब्ध पानी का विवेकपूर्ण उपयोग महत्वपूर्ण रहेगा।
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