महाराष्ट्र में 10 लाख टन तक घट सकता है चीनी उत्पादन, इथेनॉल उत्पादन में भी गिरावट की आशंका
23 अक्टूबर 2026, भोपाल: महाराष्ट्र में 10 लाख टन तक घट सकता है चीनी उत्पादन, इथेनॉल उत्पादन में भी गिरावट की आशंका – महाराष्ट्र में अनियमित बारिश और सूखे जैसे हालात के कारण इस साल गन्ने की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। इसका असर राज्य के चीनी उद्योग पर पड़ सकता है। महाराष्ट्र के चीनी आयुक्त डॉ. संजय कोल्टे के अनुसार, चालू सीजन में राज्य का चीनी उत्पादन पिछले साल की तुलना में करीब 10 लाख मीट्रिक टन कम रह सकता है। वहीं, इथेनॉल उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत गिरावट आने का अनुमान है।
89 से 90 लाख टन रह सकता है चीनी उत्पादन
कृषि विभाग और विशेषज्ञ समिति के आकलन के मुताबिक, महाराष्ट्र में चालू सीजन के दौरान चीनी उत्पादन 89 से 90 लाख मीट्रिक टन रहने की संभावना है। पिछले सीजन में राज्य में करीब 99 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन हुआ था। इस तरह इस बार उत्पादन में लगभग 9 से 10 लाख मीट्रिक टन की कमी आ सकती है। गन्ने की पैदावार में संभावित गिरावट को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है।
गन्ने की पेराई भी घटने का अनुमान
गन्ने की उपलब्धता कम रहने से इस साल चीनी मिलों में पेराई का आंकड़ा भी घट सकता है। पिछले सीजन में महाराष्ट्र में करीब 1,045 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई हुई थी। इस सीजन में इसके घटकर लगभग 900 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। पेराई में कमी आने से चीनी उत्पादन के साथ ही मिलों की कार्यप्रणाली और उनसे जुड़े दूसरे कारोबार पर भी असर पड़ सकता है।
इथेनॉल उत्पादन में 30 प्रतिशत गिरावट की आशंका
चीनी उत्पादन में संभावित कमी का असर इथेनॉल निर्माण पर भी पड़ने की आशंका है। अनुमान के मुताबिक, इस सीजन में महाराष्ट्र का इथेनॉल उत्पादन लगभग 30 प्रतिशत तक घट सकता है। इससे चीनी उद्योग के सामने अतिरिक्त चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। गन्ने की कम उपलब्धता के कारण मिलों को चीनी और इथेनॉल उत्पादन के बीच संसाधनों का संतुलन बनाने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
चीनी उद्योग के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा सीजन
अनियमित बारिश और सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण गन्ने की उपलब्धता में कमी महाराष्ट्र के चीनी उद्योग के लिए चिंता का विषय बन सकती है। उत्पादन और पेराई में गिरावट का असर मिलों की आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ने की आशंका है। अब आगामी सीजन में गन्ने की वास्तविक उपलब्धता और पेराई की स्थिति से ही स्पष्ट होगा कि चीनी तथा इथेनॉल उत्पादन में कितनी कमी आती है।
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