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राज्य कृषि समाचार (State News)

सूक्ष्म सिंचाई के साथ सेंसर आधारित ऑटोमेशन फर्टिगेशन प्रणाली किसानों के लिए हो रही है लाभकारी सिद्ध : उद्यानिकी मंत्री  

02 फरवरी 2026, भोपाल: सूक्ष्म सिंचाई के साथ सेंसर आधारित ऑटोमेशन फर्टिगेशन प्रणाली किसानों के लिए हो रही है लाभकारी सिद्ध : उद्यानिकी मंत्री – उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है और किसानों का सशक्तिकरण राज्य के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान में जल संसाधनों की सीमित उपलब्धता और लगातार बढ़ती उत्पादन लागत को देखते हुए आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना समय की आवश्यकता बन गया है। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी फसलों में सूक्ष्म सिंचाई के साथ सेंसर आधारित ऑटोमेशन फर्टिगेशन प्रणाली किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है।

मंत्री कुशवाह शनिवार को भोपाल स्थित प्रमुख उद्यान (गुलाब गार्डन) में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार कृषि को लाभ का धंधा बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है और इसी क्रम में उद्यानिकी क्षेत्र को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। कार्यशाला के साथ-साथ भोपाल में राज्य स्तरीय पुष्प प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है।

कम पानी और खाद से बेहतर उत्पादन

मंत्री कुशवाह ने बताया कि सूक्ष्म सिंचाई एवं सेंसर आधारित ऑटोमेशन फर्टिगेशन प्रणाली के माध्यम से जल और उर्वरकों का दक्ष उपयोग संभव है। इस तकनीक से किसान उच्च गुणवत्ता की खेती कर सकते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता, उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने किसानों से आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने का आह्वान किया।

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जल, उर्वरक और श्रम लागत में होगी बचत

उद्यानिकी सचिव जॉन किंग्सली ने बताया कि इस प्रणाली के माध्यम से पौधों को उनकी वास्तविक आवश्यकता के अनुसार संतुलित मात्रा में पानी और उर्वरक उपलब्ध कराया जाता है। इससे जल और उर्वरकों की बचत के साथ-साथ श्रम लागत में कमी आती है। उन्होंने कहा कि इस तकनीक से खरपतवार नियंत्रण आसान होता है और मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार होता है, जिससे किसानों को दीर्घकालीन लाभ मिलता है।

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पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू हो रही योजना

कार्यशाला में जानकारी दी गई कि यह योजना प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में क्रियान्वित की जा रही है। योजना के अंतर्गत प्रति हितग्राही एक यूनिट का लाभ दिया जाएगा। इसके लिए कृषक के पास न्यूनतम 0.250 हेक्टेयर रकबा उद्यानिकी फसलों के अंतर्गत होना अनिवार्य है।

एमआईडीएच योजना के तहत 50 प्रतिशत अनुदान

परियोजना के अंतर्गत भारत सरकार की एमआईडीएच (MIDH) योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रति हितग्राही निर्धारित इकाई लागत 4 लाख रुपये रखी गई है। इस पर 50 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाएगा। इस प्रकार अधिकतम 2 लाख रुपये तक का अनुदान किसानों को मिलेगा, जिससे वे आधुनिक तकनीक को अपनाने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

715 किसानों के खेतों में स्थापना का लक्ष्य

उद्यानिकी आयुक्त श्री अरविंद दुबे ने बताया कि प्रदेश में सेंसर आधारित ऑटोमेशन फर्टिगेशन प्रणाली को 715 कृषकों के खेतों में स्थापित करने का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है। इसके विरुद्ध अब तक 597 कृषकों द्वारा विभागीय पोर्टल पर आवेदन किए जा चुके हैं। शेष पात्र किसानों को योजना से जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

योजना के सफल क्रियान्वयन पर जोर

कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि योजना के सफल क्रियान्वयन में मैदानी स्तर पर कार्यरत अमला महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि वही सीधे किसानों से संपर्क में रहता है। जिला अधिकारियों, निर्माता कंपनियों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय से ही योजना को शत-प्रतिशत लागू किया जा सकता है।

किसानों को समय पर मिले तकनीकी सहायता

अपर संचालक किरार ने मैदानी अधिकारियों से आग्रह किया कि किसानों को योजना की पूरी जानकारी दी जाए और आवश्यकता पड़ने पर त्वरित तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि संयंत्र स्थापना में अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने कहा कि किसानों के आवेदन विभागीय पोर्टल पर समय पर दर्ज कराए जाएं, जिससे उन्हें योजना का लाभ शीघ्र मिल सके।

आधुनिक तकनीक से जुड़ेगा अधिक किसान वर्ग

कार्यक्रम के समापन पर विश्वास व्यक्त किया गया कि राज्य स्तरीय कार्यशाला के माध्यम से प्रदेश में सूक्ष्म सिंचाई और सेंसर आधारित तकनीकों को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाया जा सकेगा और अधिक से अधिक किसान आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर लाभान्वित होंगे। 


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