सीहोर: खरीफ फसलों की अनुशंसित एवं नवीनतम किस्मों का चयन करें
16 जून 2026, सीहोर: सीहोर: खरीफ फसलों की अनुशंसित एवं नवीनतम किस्मों का चयन करें – भारतीय मौसम विभाग के अनुसार आगामी दिनों में मध्यप्रदेश में मानसून आने की संभावना है, ऐसे में खरीफ फसलों से संबंधित कृषि आदान, बीज, खाद, खरपतवारनाशक व दवा का उचित भण्डारण कर लें। कृषि वैज्ञानिक के अनुसार उन्नत प्रजातियां- सोयाबीन- जे.एस.-2212, जे.एस.-2216, जे.एस.-2172, जेएस.-2094, जे.एस.- 2098,एनआर. सी. 150, एनआर. सी.-152 एनआरसी.-142, सुगंधित धान- पूसा-1847, पूसा-1637, पूसा-1718, पूसा-1728, पूसा-1692. • मोटी धान- सहभागी, एम.टी.यू. -1010. हाइब्रिड धान- जे. आर.एच.-56, जे. आर.एच.-8, जे.आर.एच. 19. • उड़द- आई.पी. यू.-13-01, आई.पी. यू.-10-26, टी.जे.यू.-130, टी.जे.यू.-339, प्रताप उड़द-1, इन्दिरा उड़द-1. अरहर- आई.पी.ए.-15-06, जी. आर. जी. – 152 (भीमा), पूसा-16. मक्का- जवाहर मक्का 12, जवाहर मक्का 1014, पूसा जवाहर हाइब्रिड-2. ज्वार- आर. बी. जे. 2357, आर. बी. जे. 1862, मूंगफली- जे.जी. एन. 23, मल्लिका, फूले भारती, तिल- टी.के.जी.-55, टी. के. जी. 308. • कोदो- जवाहर कोदो-137, जवाहर कोदो-9-1. कुटकी- जवाहर कुटकी-36, जवाहर कुटकी-95. रागी इन्दिरा रागी-1, छत्तीसगढ़ रागी-3. खरीफ प्याज- एन-53, एग्री फाउंड डार्क रेड, भीमा सुपर, भीमा डार्क रेड. मुनगा- पी.के.एम.- 1, पी.के.एम.-2, ओ.डी.सी. -3. • गेंदा- पूसा बसंती, पूसा नारंगी, अर्का हनी, अर्का बंगारा 2. पपीता पूसा नन्हा, पूसा डवार्फ, खाद व उर्वरक कितना दें।
कृषि वैज्ञानिक अनुसार सोयाबीन- 20:60:40:20 एन.पी.के. किग्रा/है. सुगंधित धान व मक्का- 100:60:40 एन.पी.के. किग्रा / है. मूंग, उड़द एवं अरहर-20:60:20 एन.पी.के. किग्रा/है. उन्नत कृषि यंत्र – वर्षा की अनिश्चितता, अधिक वर्षा, अल्प वर्षा एवं बारिश में लम्बे अंतराल को देखते हुए खरीफ फसलों की बुवाई के लिए बुवाई मशीन सीड ड्रिल में वी आकार की पंजी को लगाकर फसलों की बुवाई मेढ़ एवं नाली पद्धति से करें या खरीफ फसलों की बुवाई के लिए रेज्ड बैड प्लांटर का उपयोग भी किया जा सकता है। उन्नत बीजों की उपलब्धता- खरीफ फसलों के उन्नत बीजों की उपलब्धता के लिए राष्ट्रीय बीज निगम, मध्यप्रदेश राज्य एवं बीज विकास निगम, शासकीय कृषि प्रक्षेत्र, बीज उत्पादक समीतियां वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय, आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द्र, कृषि महाविद्यालय एवं प्रत्येक जिले में स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र में सम्पर्क करें।
खरीफ फसलों का जैविक बीज उपचार– खरीफ फसलों का जैविक बीजोपचार ट्राइकोडर्मा विरिडी 10 ग्राम/किलो बीज एवं रसायनिक बीजोपचार थायरम 3 ग्राम / किलो बीज या कार्बोन्डाजिम 5 मैन्कोजेब 2 ग्राम/किलो बीज से करें। बीज उपचार का सही क्रम ;द्ध फफूंदनाशक, कीटनाशक एवं कल्चर का रखें। जिन क्षेत्रों में फसलों में दीमक की समस्या आती है वहां पर नियंत्रण हेतु कीटनाशक क्लोरपाइरीफॉस 5 मिली/किलो बीज की दर से करें। फफूंदनाशक व कीटनाशक से बीजोपचार के बाद दलहनी फसलों को राइजोबियम कल्चर एवं धान्य फसलों को एजेटोबैक्टर कल्चर 5 ग्राम/किलो बीज की दर से उपचारित कर बुवाई करें। फलदार बगीचा- किसान भाई अपने जिले की जलवायु, मृदा, औसत वर्षा को ध्यान में रखते हुए फलदार बगीचा आम, अमरूद, नींबू, संतरा, सीताफल, कटहल, केला आदि लगाने के लिए अपने जिले के सहायक संचालक उद्यानिकी से सम्पर्क कर विस्तृत जानकारी लें। पशुपालन- पशुओं के भूंसे में पोषकता बढ़ाने के लिए यूरिया से उपचारित करें, पशुओं में एंथ्रेक्स, गलघोटू, लंगड़ी बुखार का टीका लगवायें, पशुओं को बाहय परजीवी दवा ब्यूटॉक्स से स्नान तथा पशु शाला में भी दवा का छिड़काव करें। अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के पशु चिकित्सक से सम्पर्क करें।
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