चंदन की खेती से किसानों की बढ़ सकती है आमदनी, 10 से 25 साल में तैयार होती है लकड़ी
01 सितंबर 2026, भोपाल: चंदन की खेती से किसानों की बढ़ सकती है आमदनी, 10 से 25 साल में तैयार होती है लकड़ी – चंदन की लकड़ी की बाजार में हमेशा अच्छी मांग रहती है और इसकी कीमत भी अन्य कई लकड़ियों की तुलना में अधिक होती है। यही वजह है कि चंदन की खेती किसानों के लिए लंबी अवधि में बेहतर आमदनी का विकल्प बन सकती है। चंदन का उपयोग औषधियों के साथ साबुन, अगरबत्ती, इत्र, सौंदर्य प्रसाधन, हवन सामग्री, माला और सजावटी वस्तुएं बनाने में किया जाता है।
खास बात यह है कि किसान इसे खेत की मुख्य फसल के साथ मेड़, खेत के किनारे या खाली पड़ी जमीन पर भी लगा सकते हैं। हालांकि चंदन की खेती शुरू करने से पहले स्थानीय वन विभाग के नियमों और कटाई व परिवहन संबंधी अनुमति की जानकारी लेना जरूरी है।
सफेद चंदन की रहती है मांग
भारत में चंदन की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें सफेद चंदन और लाल चंदन प्रमुख हैं। सफेद चंदन की लकड़ी और तेल का इस्तेमाल औषधीय, सुगंधित और सौंदर्य प्रसाधन संबंधी उत्पादों में किया जाता है। इसकी खुशबू और उपयोगिता के कारण बाजार में इसकी मांग बनी रहती है।
लंबे इंतजार के बाद मिलता है फायदा
चंदन की खेती में किसानों को धैर्य रखना पड़ता है। उपलब्ध खेती पद्धतियों और प्रबंधन के अनुसार पेड़ों को उपयोगी आकार तक पहुंचने में कई वर्ष लग सकते हैं। कुछ दावों में जैविक तरीके से 10 से 15 वर्ष और पारंपरिक तरीके से 20 से 25 वर्ष में लकड़ी मिलने की बात कही जाती है। वास्तविक अवधि पौधों की वृद्धि, जलवायु, मिट्टी और प्रबंधन पर निर्भर करती है। चंदन की खेती को इसलिए तुरंत कमाई वाली फसल के बजाय दीर्घकालीन निवेश के रूप में देखना बेहतर है। किसान चाहें तो खेत के किनारों पर सीमित संख्या में पौधे लगाकर पारंपरिक फसलों के साथ इसका विकल्प विकसित कर सकते हैं।
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