सोयाबीन में सफेद मक्खी-एफिड का खतरा, देवास के किसानों को वैज्ञानिकों ने बताए बचाव के तरीके
10 सितंबर 2026, भोपाल: सोयाबीन में सफेद मक्खी-एफिड का खतरा, देवास के किसानों को वैज्ञानिकों ने बताए बचाव के तरीके – किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग एवं कृषि विज्ञान केन्द्र देवास की डायग्नोस्टिक टीम द्वारा ग्राम टोंककलां, रंधनखेड़ी एवं चिड़ावद में कृषकों के प्रक्षेत्रों का निरीक्षण कर सोयाबीन फसल की स्थिति का जायजा लिया गया। इस दौरान कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर.पी. शर्मा ने कृषकों को सोयाबीन फसल में सफेद मक्खी एवं एफिड की रोकथाम के लिए थायमेथोक्सम+लेम्डा सायहेलोथ्रिन 125 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर अथवा एसीटेमीप्रिड 25 प्रतिशत+बायफेथ्रिन 25 प्रतिशत डब्ल्यूजी 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी। साथ ही सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए खेत के विभिन्न स्थानों पर पीले स्टिकी ट्रैप लगाने की सलाह दी गई।
निरीक्षण के दौरान दल द्वारा किसानों को सेमीलूपर इल्ली के नियंत्रण के लिए क्लोरएंट्रानिलिप्रोल 18.5 एसपी 150 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर अथवा इंडोक्साकार्ब 15.8 ईसी 333 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने, पौध संरक्षण के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी के साथ अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव, नेपसेक स्प्रेयर से 450 से 500 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर तथा ट्रैक्टर चालित पावर स्प्रेयर से 120 से 150 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर की मात्रा का उपयोग करने की सलाह दी गई।
निरीक्षण दल द्वारा बताया गया कि अधिक वर्षा होने की स्थिति में खेतों से अतिरिक्त जल की निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि फसल को जलभराव से होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।
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