अरहर में तना अंगमारी और मूंग-उड़द में पीला मोजेक का खतरा, कृषि विभाग ने बताई दवा की मात्रा
10 सितंबर 2026, बालोदाबाजार(छत्तीसगढ़): अरहर में तना अंगमारी और मूंग-उड़द में पीला मोजेक का खतरा, कृषि विभाग ने बताई दवा की मात्रा – खेतों में बनी नमी और अनुकूल मौसम के चलते अरहर, मूंग और उड़द की फसलों पर कीट-रोगों का खतरा बढ़ गया है। कृषि विज्ञान केंद्र भाटापारा और जिला कृषि विभाग, बालोदाबाजार ने संयुक्त रूप से किसानों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए अरहर में तना अंगमारी रोग और मूंग-उड़द में पीला मोजेक वायरस को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।
एडवाइजरी के अनुसार अरहर के पौधों के तने पर भूरे से गहरे भूरे रंग के धब्बे दिखाई देना तना अंगमारी रोग का शुरुआती लक्षण है। गंभीर स्थिति में पत्तियां पीली पड़कर मुरझाने लगती हैं। वहीं मूंग-उड़द में सफेद मक्खी के जरिये फैलने वाला पीला मोजेक वायरस और चूर्णिल आसिता (पाउडरी मिल्ड्यू) रोग भी इस समय सक्रिय पाया जा रहा है।
किस रोग पर कौन-सी दवा, कितनी मात्रा
अरहर में तना अंगमारी की रोकथाम के लिए कृषि विज्ञान केंद्र ने कॉपर आधारित फफूंदनाशक 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी या मेटालैक्सिल एम-जेड 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से 10 से 12 दिन के अंतराल पर तीन बार छिड़काव करने की सलाह दी है। मूंग-उड़द में चूर्णिल आसिता रोग के लिए घुलनशील गंधक (सल्फर) 3 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करने को कहा गया है।
पीला मोजेक वायरस फैलाने वाली सफेद मक्खी को नियंत्रित करने के लिए इमिडाक्लोप्रिड (कॉन्फिडोर) 0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के घोल का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इसी एडवाइजरी में धान में पत्ती मोड़क व तना छेदक और मक्का में फॉल आर्मीवर्म कीट पर भी नजर रखने की चेतावनी दी गई है, क्योंकि खेतों में लगातार बनी नमी इन कीटों के प्रकोप को बढ़ा सकती है।
कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों के अनुसार पीला मोजेक जैसे विषाणु जनित रोगों का सीधा इलाज संभव नहीं होता, इसलिए इसे फैलाने वाली सफेद मक्खी पर समय रहते नियंत्रण करना ही सबसे कारगर उपाय है। जिन खेतों में रोगग्रस्त पौधे दिखें, उन्हें जल्द से जल्द उखाड़कर खेत से बाहर नष्ट करने की भी सलाह दी गई है, ताकि रोग आसपास के स्वस्थ पौधों तक न फैले।
किसानों के लिए सावधानी
कृषि विभाग ने साफ किया है कि उर्वरक या कीटनाशक के छिड़काव की योजना मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर बनानी चाहिए, ताकि बारिश से पहले या तेज धूप में छिड़काव बेअसर न हो जाए। किसानों को सलाह दी गई है कि खेत का नियमित निरीक्षण करें और लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या ग्राम कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क करें।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि एक ही दवा का बार-बार इस्तेमाल करने से कीटों में उसके प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है, इसलिए सुझाई गई दवाओं को बदल-बदल कर इस्तेमाल करना बेहतर रहता है। साथ ही किसी भी दवा का छिड़काव करने से पहले पैकेट पर दी गई मात्रा और सावधानियों को जरूर पढ़ने की सलाह दी गई है।
बालोदाबाजार जिला मुख्य रूप से धान और दलहन-तिलहन खेती के लिए जाना जाता है, इसलिए यहां अरहर और मूंग-उड़द की फसल खराब होने का सीधा असर बड़ी संख्या में किसान परिवारों की सालाना आमदनी पर पड़ता है। यही वजह है कि कृषि विभाग हर सप्ताह मौसम और खेतों की स्थिति के आधार पर नई सलाह जारी करता रहता है।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

