राज्य कृषि समाचार (State News)

कमजोर मानसून का खतरा! किसान इन फसलों की करें खेती, कम बारिश में भी मिलेगा बेहतर उत्पादन

27 जून 2026, भोपाल: कमजोर मानसून का खतरा! किसान इन फसलों की करें खेती, कम बारिश में भी मिलेगा बेहतर उत्पादन – आगामी खरीफ सीजन में एल-नीनो के प्रभाव और कम वर्षा की संभावित स्थिति को देखते हुए मध्यप्रदेश कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष कृषि आकस्मिक (कंटीजेंसी) योजना तैयार की है। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे कम पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक खेती अपनाएं और वैकल्पिक फसलों की बुवाई कर अपनी लागत और उत्पादन को सुरक्षित रखें।

उमरिया जिले के कृषि उप संचालक ने बताया कि जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने संभावित कमजोर मानसून को देखते हुए किसानों के लिए विस्तृत कृषि सलाह जारी की है। इसका उद्देश्य कम बारिश की स्थिति में भी किसानों को नुकसान से बचाना और बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करना है।

धान की रोपाई के बजाय अपनाएं DSR तकनीक

कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि सीमित जल उपलब्धता की स्थिति में पारंपरिक धान रोपाई के बजाय डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) पद्धति से सीधी बुवाई करें। इस तकनीक से पानी की खपत कम होती है और फसल की बुवाई भी समय पर हो जाती है।

इसके साथ ही संकर (हाइब्रिड) धान के बजाय जेआर-206, जेआर-201 और आईआर-64 जैसी कम अवधि में पकने वाली किस्मों की बुवाई करने की सलाह दी गई है।

15 जुलाई तक बारिश नहीं हुई तो इन फसलों की करें बुवाई

कृषि विभाग ने कहा है कि यदि 15 जुलाई तक पर्याप्त वर्षा नहीं होती, तो किसान धान की जगह कम पानी में होने वाली मोटे अनाज की फसलें कोदो, कुटकी और रागी की बुवाई को प्राथमिकता दें। ये फसलें कम वर्षा की स्थिति में भी बेहतर प्रदर्शन करती हैं।

दलहनी और तिलहनी फसलों के लिए अपनाएं यह तरीका

विभाग ने किसानों को सोयाबीन, मूंग और उड़द जैसी दलहनी एवं तिलहनी फसलों की बुवाई रिज एंड फरो (मेड़ एवं नाली) पद्धति से करने की सलाह दी है। इस तकनीक से कम बारिश के दौरान खेत में नमी बनी रहती है, जबकि अधिक बारिश होने पर अतिरिक्त पानी आसानी से निकल जाता है।

इसके अलावा सूखे के जोखिम को कम करने के लिए सोयाबीन-अरहर (4:2) तथा मक्का-अरहर (2:1) की अंतरवर्तीय खेती अपनाने की भी सलाह दी गई है।

फसल बीमा जरूर कराएं

उप संचालक कृषि ने किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसलों का बीमा कराने की अपील की है। उनका कहना है कि कम वर्षा या अन्य प्राकृतिक आपदा की स्थिति में फसल बीमा किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा।

खेतों में करें जल संरक्षण

कृषि विभाग ने किसानों को समय पर मेड़बंदी, जल संचयन और निराई-गुड़ाई करने की सलाह दी है, ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे। साथ ही मृदा परीक्षण की अनुशंसा के अनुसार संतुलित उर्वरकों का उपयोग करने और यूरिया (नाइट्रोजन) का प्रयोग विभाजित मात्रा में करने की भी सलाह दी गई है।

मौसम की जानकारी पर रखें नजर

कृषि विभाग ने किसानों से कहा है कि वे मौसम में हो रहे बदलाव को देखते हुए कृषि विभाग और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी मौसम आधारित कृषि सलाह का नियमित पालन करें। साथ ही ‘मौसम’ मोबाइल ऐप डाउनलोड कर समय-समय पर मौसम की जानकारी और कृषि संबंधी परामर्श प्राप्त करते रहें।

कृषि विभाग का कहना है कि समय रहते वैज्ञानिक सलाह अपनाकर किसान कम बारिश की स्थिति में भी फसल नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं और खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। 

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