राज्य कृषि समाचार (State News)

बिजली बिल और पावर कट से राहत, सोलर पंप से बढ़ी किसानों की आमदनी; अब धान के साथ उगा रहे सब्जियां  

14 अगस्त 2026, रायपुर: बिजली बिल और पावर कट से राहत, सोलर पंप से बढ़ी किसानों की आमदनी; अब धान के साथ उगा रहे सब्जियां – छत्तीसगढ़ की सौर सुजला योजना वनांचल क्षेत्रों के किसानों के लिए खेती का सहारा बन रही है। नारायणपुर और बस्तर जैसे दूरदराज इलाकों में रियायती दरों पर सोलर सिंचाई पंप मिलने से किसानों को सिंचाई के लिए बिजली पर निर्भरता कम हुई है। अब किसान बिजली बिल और बिजली कटौती की चिंता किए बिना खेतों में सिंचाई कर पा रहे हैं। इससे कई किसान धान के साथ सब्जियों और अन्य नकदी फसलों की खेती भी करने लगे हैं।

सोलर पंप से मिली सिंचाई की सुविधा

नारायणपुर जिले के वनांचल और विद्युतविहीन क्षेत्रों में क्रेडा (CREDA) की ओर से किसानों को सौर ऊर्जा से चलने वाले सिंचाई पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। योजना के तहत किसानों को 2 एचपी, 3 एचपी और 5 एचपी क्षमता के सोलर पंप रियायती दरों पर दिए जा रहे हैं। सौर ऊर्जा से चलने वाले इन पंपों की मदद से किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए बिजली कटौती का इंतजार नहीं करना पड़ता। वहीं बिजली बिल का खर्च भी कम होता है। इससे किसानों को खेती की लागत घटाने में मदद मिल रही है।

धान के साथ अब सब्जियों और नकदी फसलों की खेती

सोलर पंप लगने से पहले वनांचल के कई किसान बारिश पर निर्भर रहते थे और मुख्य रूप से धान की खेती करते थे। सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद खेती का तरीका बदल रहा है। अब किसान धान के साथ साग-सब्जियों और अलग-अलग नकदी फसलों की खेती कर रहे हैं। खेतों में पानी की उपलब्धता बेहतर होने से किसान साल में एक से अधिक फसल लेने में भी सक्षम हो रहे हैं। इससे उनकी खेती से होने वाली आमदनी बढ़ाने के नए रास्ते खुले हैं।

9 साल में 4,722 से ज्यादा खेतों में लगे सोलर पंप

क्रेडा विभाग के अनुसार, नारायणपुर जिले में पिछले 9 वर्षों में 4,722 से अधिक किसानों के खेतों में सोलर सिंचाई पंप स्थापित किए जा चुके हैं। इससे जिले में सिंचित क्षेत्र का विस्तार हुआ है और किसानों को खेती के लिए नियमित सिंचाई सुविधा मिल रही है।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे किसान

सौर सुजला योजना से किसानों को सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा का विकल्प मिल रहा है। नियमित पानी मिलने से किसान पारंपरिक खेती के साथ दूसरी फसलों की ओर भी बढ़ रहे हैं। इससे फसल विविधीकरण, खेती की लागत में कमी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है। योजना ने वनांचल के किसानों के लिए खेती को पहले की तुलना में ज्यादा सुविधाजनक और लाभकारी बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

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