राजस्थान: सवाई माधोपुर के दो प्रगतिशील किसान राज्य स्तरीय कृषक पुरस्कार के लिए चयनित
28 मई 2026, भोपाल: राजस्थान: सवाई माधोपुर के दो प्रगतिशील किसान राज्य स्तरीय कृषक पुरस्कार के लिए चयनित – कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों, जैविक खेती और उद्यानिकी आधारित मॉडल अपनाकर सवाई माधोपुर जिले के दो प्रगतिशील किसानों ने राज्य स्तर पर नई पहचान बनाई है। आत्मा योजना अंतर्गत वर्ष 2024-25 के राज्य स्तरीय कृषक पुरस्कार के लिए प्रदेशभर से चयनित 10 किसानों में जिले के रामसिंह मीणा और लखनलाल मीणा का चयन किया गया है।

राज्य कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान, जयपुर द्वारा जारी सूची में दोनों किसानों को कृषि क्षेत्र में नवाचार, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है।
जिले के लिए गौरव की बात: जिला कलेक्टर
जिला कलक्टर काना राम ने दोनों किसानों की उपलब्धि को जिले के लिए गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान आधुनिक और नवाचार आधारित खेती अपनाने वाले अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का काम करेगा।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सोच और तकनीक आधारित खेती से किसान सीमित संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन और अधिक आय अर्जित कर सकते हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद रामसिंह मीणा बने प्रगतिशील किसान
ग्राम गंभीरा निवासी एवं सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर रामसिंह मीणा ने पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक बागवानी मॉडल अपनाकर नई मिसाल पेश की है। आत्मा योजना के तहत आयोजित प्रशिक्षण, कृषक भ्रमण और तकनीकी मार्गदर्शन का लाभ लेकर उन्होंने अपने खेत को आधुनिक कृषि प्रयोगशाला के रूप में विकसित किया।
करीब 2.85 हेक्टेयर भूमि पर उन्होंने अमरूद, नींबू, आम, संतरा और चीकू जैसे फलों की मिश्रित बागवानी विकसित की है। आधुनिक तकनीकों और नवाचारों के कारण उनकी वार्षिक आय 8 से 10 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
रामसिंह मीणा का फार्महाउस अब क्षेत्र के किसानों के लिए सीखने और प्रेरणा का केंद्र बन चुका है। आसपास के किसान नियमित रूप से उनके खेत का भ्रमण कर पौध संरक्षण, जैविक खेती, मिश्रित बागवानी और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।
ग्रीनहाउस और ड्रिप सिंचाई से बढ़ाई आय
ग्राम दिवाड़ा निवासी किसान लखनलाल मीणा ने उद्यानिकी क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को अपनाकर संरक्षित खेती का सफल मॉडल तैयार किया है। उन्होंने ग्रीनहाउस, अमरूद का बगीचा, प्याज भंडारण, मल्चिंग शीट, ड्रिप सिंचाई, फार्म पॉण्ड और वर्मी कम्पोस्ट इकाई स्थापित कर खेती को लाभकारी बनाया है।
राजस्थान संरक्षित खेती मिशन के तहत स्थापित ग्रीनहाउस में वे खीरे का उत्पादन कर प्रतिवर्ष लगभग 8 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।
किसानों के लिए बनेंगे प्रेरणा
दोनों किसानों की सफलता जिले के अन्य किसानों को नवाचार, जल संरक्षण और वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ऐसे मॉडल भविष्य में जिले को कृषि नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएंगे।
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