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रेज्ड बेड या BBF: जानिए सोयाबीन की फसल के लिए कौन-सी तकनीक दिलाएगी अधिक पैदावार और बेहतर मुनाफा

24 जून 2026, नई दिल्ली: रेज्ड बेड या BBF: जानिए सोयाबीन की फसल के लिए कौन-सी तकनीक दिलाएगी अधिक पैदावार और बेहतर मुनाफा – खरीफ सीजन में सोयाबीन की बुवाई जोरों पर है और किसान बेहतर उत्पादन के लिए आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में रेज्ड बेड (Raised Bed) और ब्रॉड बेड एंड फरो (BBF) दो ऐसी तकनीकें है, जो न केवल जल प्रबंधन को बेहतर बनाती हैं, बल्कि फसल की उत्पादकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालांकि, दोनों प्रणालियों की संरचना, उपयोगिता और लाभ अलग-अलग हैं। इसलिए किसानों के लिए यह जानना जरूरी है कि उनकी भूमि, जलवायु और सिंचाई व्यवस्था के अनुसार कौन-सी तकनीक अधिक फायदेमंद साबित हो सकती है।

क्या है रेज्ड बेड तकनीक?

रेज्ड बेड प्रणाली में खेत में अपेक्षाकृत ऊंची और संकरी क्यारियां बनाई जाती हैं तथा उनके बीच नालियां छोड़ी जाती हैं। फसल की बुवाई इन क्यारियों पर की जाती है, जबकि सिंचाई का पानी नालियों के माध्यम से प्रवाहित किया जाता है।

इस तकनीक में सामान्यतः बेड की चौड़ाई 60 से 120 सेंटीमीटर तथा ऊंचाई 15 से 30 सेंटीमीटर तक रखी जाती है। यह पद्धति विशेष रूप से सिंचित और अर्ध-सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

क्या है ब्रॉड बेड एंड फरो (BBF) तकनीक?

ब्रॉड बेड एंड फरो यानी बीबीएफ प्रणाली में अपेक्षाकृत चौड़े और कम ऊंचाई वाले बेड बनाए जाते हैं तथा उनके बीच गहरी नालियां छोड़ी जाती हैं। इसका मुख्य उद्देश्य अतिरिक्त वर्षा जल की निकासी सुनिश्चित करना होता है।

इस पद्धति में बेड की चौड़ाई सामान्यतः 120 से 150 सेंटीमीटर तथा ऊंचाई 10 से 20 सेंटीमीटर तक होती है। भारी वर्षा और जलभराव वाले क्षेत्रों में यह तकनीक विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है।

जल प्रबंधन में कौन-सी तकनीक बेहतर?

जल प्रबंधन की दृष्टि से दोनों तकनीकों की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं।

रेज्ड बेड प्रणाली में सिंचाई का पानी केवल नालियों में दिया जाता है, जिससे 20 से 40 प्रतिशत तक पानी की बचत संभव होती है। इसके अलावा जल उपयोग दक्षता भी बढ़ती है।

वहीं BBF तकनीक अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त पानी को तेजी से बाहर निकालने में मदद करती है। इससे खेत में जलभराव की समस्या कम होती है और पौधों की जड़ों को नुकसान नहीं पहुंचता।

विशेषज्ञों के अनुसार, जहां सिंचाई जल सीमित हो वहां रेज्ड बेड बेहतर विकल्प है, जबकि अधिक वर्षा और भारी मिट्टी वाले क्षेत्रों में BBF तकनीक अधिक प्रभावी साबित होती है।

मृदा स्वास्थ्य और जड़ विकास पर असर

रेज्ड बेड पद्धति में मिट्टी में वायु संचार बेहतर होता है, जिससे जड़ों का विकास गहरा और मजबूत होता है। इसके कारण पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और पोषक तत्वों का अवशोषण भी अधिक प्रभावी ढंग से होता है।

दूसरी ओर, BBF प्रणाली मिट्टी के कटाव को कम करती है और वर्षा जल के बहाव को नियंत्रित करती है। इससे खेत की उपजाऊ मिट्टी सुरक्षित रहती है और मृदा संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।

सोयाबीन की पैदावार पर क्या पड़ता है प्रभाव?

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, रेज्ड बेड तकनीक अपनाने पर अंकुरण बेहतर होता है और पौधों की वृद्धि समान रूप से होती है। कई अध्ययनों में इस तकनीक से 10 से 20 प्रतिशत तक अधिक उत्पादन मिलने की बात सामने आई है।

वहीं BBF तकनीक में जलभराव की समस्या कम होने के कारण पौधों का जीवित प्रतिशत अधिक रहता है। वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों में यह तकनीक स्थिर उत्पादन देने में मदद करती है।

लागत और यंत्रीकरण के लिहाज से अंतर

रेज्ड बेड तकनीक के लिए विशेष उपकरणों की आवश्यकता पड़ सकती है, जिससे प्रारंभिक लागत कुछ अधिक हो सकती है। हालांकि लंबे समय में जल बचत और बेहतर उत्पादन के कारण यह निवेश लाभदायक साबित होता है।

BBF तकनीक बड़े खेतों में आसानी से अपनाई जा सकती है और यंत्रीकरण के लिए भी उपयुक्त मानी जाती है। इसलिए व्यावसायिक खेती करने वाले किसानों के बीच इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

रेज्ड बेड तकनीक के प्रमुख फायदे

  • 20 से 40 प्रतिशत तक सिंचाई जल की बचत।
  • पौधों की जड़ों का बेहतर विकास।
  • उर्वरकों की उपयोग दक्षता में वृद्धि।
  • खरपतवार नियंत्रण में सुविधा।
  • यंत्रीकृत खेती के लिए अनुकूल।
  • कई फसलों में अधिक उत्पादन की संभावना।

BBF तकनीक के प्रमुख फायदे

  • अतिरिक्त वर्षा जल की तेज निकासी।
  • जलभराव से फसल की सुरक्षा।
  • मिट्टी कटाव में कमी।
  • वर्षा आधारित खेती के लिए उपयुक्त।
  • पौधों की जड़ों को पर्याप्त वायु उपलब्ध।
  • जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा की स्थिति में भी बेहतर प्रदर्शन।

किसानों के लिए क्या है सही विकल्प?
यदि खेत सिंचित क्षेत्र में है और पानी की उपलब्धता सीमित है, तो रेज्ड बेड तकनीक अधिक लाभकारी साबित हो सकती है। वहीं भारी काली मिट्टी, अधिक वर्षा वाले क्षेत्र या जलभराव की समस्या वाले खेतों में BBF प्रणाली बेहतर परिणाम दे सकती है।

विशेष रूप से सोयाबीन-चना फसल प्रणाली में BBF तकनीक को काफी प्रभावी माना जाता है, जबकि सटीक सिंचाई और जल बचत पर जोर देने वाले किसान रेज्ड बेड तकनीक को प्राथमिकता दे सकते हैं।

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