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राज्य कृषि समाचार (State News)

रायपुर: विकसित कृषि संकल्प अभियान सफल, गांव-गांव पहुंचे वैज्ञानिक और किसानों को दी आधुनिक खेती की जानकारी  

22 मई 2026, रायपुर: रायपुर: विकसित कृषि संकल्प अभियान सफल, गांव-गांव पहुंचे वैज्ञानिक और किसानों को दी आधुनिक खेती की जानकारी – कृषि को आधुनिक, जलवायु-अनुकूल और लाभदायक बनाने के लिए किसानों और वैज्ञानिकों की एक पहल है, इसका मुख्य लक्ष्य वैज्ञानिक अनुसंधान (लैब) को सीधे खेतों (लैंड) तक पहुंचाना है, जिससे कृषि लागत घटेगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार और कलेक्टर सूरजपुर के मार्गदर्शन में जिले के सभी विकासखंडों में 05 मई से 20 मई 2026 तक संचालित विकसित कृषि संकल्प अभियान का सफलतापूर्वक आयोजन गया है। इस 12 दिवसीय विशेष अभियान के दौरान जिले की 144 ग्राम पंचायतों में कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा सह शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों के माध्यम से उन्नत और आधुनिक कृषि तकनीकों, नवीन शासकीय योजनाओं तथा वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी सीधे किसानों तक पहुंचाई गई।

अंतिम दिन विभिन्न विकासखंडों में शिविरों का आयोजन

अभियान के अंतिम दिन, 20 मई को जिले के विभिन्न विकासखंडों की ग्राम पंचायतों में शिविर लगाए गए, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं भैयाथान के सत्यनगर एवं बरौधी, ओड़गी के खोंड एवं धरसेंडी, सूरजपुर के सरमा एवं डूमरिया, रामानुजनगर के छिंदिया एवं भरवामुड़ा, प्रतापपुर के कोटेया एवं सोनगरा और प्रेमनगर के रघुनाथपुर एवं शिवनगर में शविरों के माध्यम से उन्नत और आधुनिक कृषि तकनीकों, नवीन शासकीय योजनाओं तथा वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी सीधे किसानों की दी।

उर्वरकों के संतुलित उपयोग और विकल्पों पर चर्चा

शिविरों में कृषि विज्ञान केन्द्र (अजिरमा, अंबिकापुर) तथा शासकीय कृषि महाविद्यालय (प्रतापपुर) के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से सीधा संवाद कर खेती-किसानी से जुड़ी उनकी समस्याओं व जिज्ञासाओं का समाधान किया। विशेषज्ञों ने संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिक अनुशंसा पर आधारित ई-उर्वरक (टोकन प्रणाली) की जानकारी दी। इसके साथ ही, डीएपी के विकल्प के रूप में अन्य रासायनिक व जैविक उर्वरकों जैसे 12:32:16, 20:20:13, 10:26:26, 28:28, 16:16:16, 14:35:14, एसएसपी , हरी खाद, जैव उर्वरक और नील-हरित काई के प्रयोग पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।

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आधुनिक कृषि यंत्रों और जैविक पद्धतियों का प्रदर्शन

किसानों को उन्नत कृषि उपकरणों व आधुनिक पद्धतियों के प्रति जागरूक करने के लिए वैज्ञानिकों ने कई महत्वपूर्ण तकनीकों की जानकारी दी गई। सीड ड्रिल, आधुनिक स्प्रेयर और पैडी ट्रांसप्लांटर का उपयोग करने की विधि, बीजोपचार, एसआरआई पद्धति और कतार बोनी, धान की शुद्धता के लिए 17 प्रतिशत नमक घोल तकनीक, प्राकृतिक खेती के लिए जीवामृत और डी-कम्पोजर तैयार करने की विधि के साथ ही किसानों से कृषि पद्धतियों को लेकर फीडबैक भी लिया गया।

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फसल चक्र परिवर्तन और विभागीय योजनाओं की जानकारी

कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने किसानों को पारंपरिक धान की खेती के स्थान पर फसल चक्र परिवर्तन अपनाने की सलाह दी। उन्होंने किसानों को अधिक लाभ कमाने के लिए दलहन, तिलहन, मक्का और मिलेट्स (लघु धान्य फसलों) जैसी फसलों के उत्पादन के लिए प्रेरित किया। इसके अतिरिक्त, शिविर में शासन की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं की भी जानकारी दी गई। मृदा स्वास्थ्य कार्ड  के अनुसार संतुलित खाद का उपयोग, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, एग्रीस्टेक, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, और किसान क्रेडिट कार्ड की जानकारी दी गई।

पशु चिकित्सा विभाग के द्वारा पशुओं को मौसमी व संक्रामक रोगों से बचाने के लिए नियमित टीकाकरण की सलाह दी गई। उद्यानिकी विभाग के द्वारा किसानों को सब्जी और फल उत्पादन (क्षेत्र विस्तार) के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने के तरीके बताए गए।मत्स्य विभाग द्वारा मछली पालन से जुड़ी विभागीय योजनाओं और अनुदानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और शासन की लाभकारी योजनाओं से सीधे जोड़ना है, ताकि खेती को अधिक वैज्ञानिक, उन्नत और मुनाफे का सौदा बनाया जा सके।

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