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राज्य कृषि समाचार (State News)

रायपुर: एक कॉल पर घर पहुंच रही पशु चिकित्सा टीम, पशुपालकों के लिए वरदान बनी 1962 हेल्पलाइन

11 जून 2026, रायपुर: रायपुर: एक कॉल पर घर पहुंच रही पशु चिकित्सा टीम, पशुपालकों के लिए वरदान बनी 1962 हेल्पलाइन – छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की पशुधन संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की पहल के तहत संचालित मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां पशुपालकों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही हैं। दूरस्थ ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों तक पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाकर यह व्यवस्था न केवल पशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, बल्कि पशुपालकों की आय बढ़ाने में भी सहायक बन रही है।

गांव-गांव पहुंच रही निःशुल्क पशु चिकित्सा सेवाएं

राज्य शासन के निर्देशानुसार जिलों में संचालित मोबाइल पशु चिकित्सा वाहनों के माध्यम से पशुपालकों को उनके घर और गांव के पास ही निःशुल्क उपचार, टीकाकरण और तकनीकी परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे विशेष रूप से उन क्षेत्रों के पशुपालकों को लाभ मिल रहा है, जहां स्थायी पशु चिकित्सालयों तक पहुंचना मुश्किल है।

मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों द्वारा निर्धारित रोस्टर के अनुसार गांवों में शिविर लगाकर पशुओं का उपचार, टीकाकरण, कृमिनाशक दवापान, डिटिकिंग, बधियाकरण, कृत्रिम गर्भाधान तथा आवश्यक दवाओं का वितरण किया जा रहा है। प्रत्येक यूनिट में पशु चिकित्सक, पैरावेट और चालक-सह-अटेंडेंट की तैनाती की गई है। साथ ही वाहनों में आधुनिक उपकरण और आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

बलरामपुर में लाखों पशुओं को मिला लाभ

पशुधन विकास विभाग के अनुसार बलरामपुर जिले में अब तक 14 हजार 374 पशु चिकित्सा शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। इन शिविरों के माध्यम से 1 लाख 67 हजार 176 पशुओं का उपचार, 1 लाख 38 हजार 892 पशुओं का टीकाकरण, 87 हजार 143 पशुओं को औषधि वितरण, 53 हजार 940 नमूनों की जांच, 12 हजार 758 बधियाकरण तथा 710 कृत्रिम गर्भाधान सेवाएं प्रदान की गई हैं।

ये आंकड़े ग्रामीण क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती पहुंच और प्रभावशीलता को दर्शाते हैं।

वैज्ञानिक पशुपालन की भी दी जा रही जानकारी

पशुधन विकास विभाग द्वारा चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ पशुपालकों को वैज्ञानिक पशुपालन, मौसमी रोगों की रोकथाम, पशुओं के बेहतर रख-रखाव और विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है। इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड सहित अन्य लाभकारी योजनाओं से जुड़ने के लिए भी ग्रामीणों को प्रेरित किया जा रहा है।

1962 हेल्पलाइन बन रही मददगार

राज्य शासन द्वारा संचालित 1962 टोल फ्री हेल्पलाइन पशुपालकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रही है। इस नंबर पर कॉल करते ही बीमार, घायल या दुर्घटनाग्रस्त पशुओं के उपचार के लिए मोबाइल पशु चिकित्सा टीम मौके पर पहुंचकर निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रही है।

घर पहुंच सेवा के कारण पशुओं की मृत्यु दर में कमी आई है। वहीं दुग्ध, मांस और अंडा उत्पादन में वृद्धि के साथ पशुपालकों की आय में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

वर्षा ऋतु में बरतें सावधानी

वर्षा ऋतु को देखते हुए विभाग द्वारा पशुपालकों को पशुओं को सुरक्षित और सूखे स्थानों पर रखने, संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाने तथा आंधी-तूफान के दौरान पेड़ों के नीचे पशुओं को नहीं बांधने जैसी सावधानियों के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।

पशुधन विकास विभाग का मानना है कि मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन संरक्षण, पशुपालकों की आर्थिक समृद्धि और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रही है।

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