राज्य कृषि समाचार (State News)

रायपुर: ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को मिला प्रशिक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार पर जोर  

12 जून 2026, रायपुर: रायपुर: ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को मिला प्रशिक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार पर जोर – आईसीएआर–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान, रायपुर द्वारा संचालित ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने और मृदा स्वास्थ्य में सुधार के उद्देश्य से एक व्यापक किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बेलटुकरी, कुर्रा, नौगांव एवं पवनी ग्रामों के कुल 51 किसान एवं महिला किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक डॉ. पी.के. राय के संबोधन से हुआ। उन्होंने किसानों को ‘खेत बचाओ अभियान’ के उद्देश्यों और महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक और असंतुलित उपयोग के कारण मृदा की उर्वरता और समग्र स्वास्थ्य में लगातार गिरावट देखी जा रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मृदा की गुणवत्ता को पुनर्स्थापित करना और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाकर कृषि भूमि की उत्पादक क्षमता को मजबूत करना है।

प्रायोगिक प्रशिक्षण और प्रदर्शन

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान किसानों को संस्थान के प्रायोगिक प्रक्षेत्र का भ्रमण भी कराया गया। यहां कार्यक्रम समन्वयक एवं संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा ने मूंग की फसल का हरी खाद के रूप में उपयोग करने का सजीव प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि हरी खाद के प्रयोग से मृदा में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है, जिससे मिट्टी की संरचना में सुधार होता है और दीर्घकाल में कृषि की स्थिरता मजबूत होती है।

वैज्ञानिकों ने दी तकनीकी जानकारी

तकनीकी सत्रों में संयुक्त निदेशक डॉ. अनिल दीक्षित ने विभिन्न हरी खाद फसलों और मृदा उर्वरता बनाए रखने में उनकी भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम की जा सकती है और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जा सकता है।

वहीं, संयुक्त निदेशक डॉ. कल्याण मंडल ने जैव उर्वरकों और जैव नियंत्रक एजेंटों के उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी किसानों को दी। उन्होंने किसानों से पर्यावरण हितैषी कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील की, जिससे टिकाऊ फसल उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

किसानों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम के समापन अवसर पर आयोजित संवादात्मक सत्र में किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर वैज्ञानिकों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। किसानों ने संस्थान द्वारा आयोजित व्यावहारिक प्रदर्शनों और प्रशिक्षण सत्रों की सराहना की।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. के.सी. शर्मा और डॉ. प्रियंका मीणा का विशेष योगदान रहा, जिनके सहयोग और प्रयासों से कार्यक्रम का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा सका।

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