रायपुर: महासमुंद में डेयरी व्यवसाय बना किसानों की आय का सहारा, रोजाना बिक रहा 34 हजार लीटर दूध
10 जून 2026, रायपुर: रायपुर: महासमुंद में डेयरी व्यवसाय बना किसानों की आय का सहारा, रोजाना बिक रहा 34 हजार लीटर दूध – छत्तीसगढ़ सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि के साथ-साथ पशुपालन और डेयरी व्यवसाय को भी बढ़ावा दे रही है। इसी दिशा में महासमुंद जिले में दुग्ध उत्पादन और विपणन का क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। जिले में वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 34 हजार लीटर दूध का विक्रय हो रहा है, जिससे हजारों पशुपालक किसानों की आय में वृद्धि हो रही है।
जिले में 1.91 लाख से अधिक पशुधन
पशुधन विकास विभाग के अनुसार महासमुंद जिले में करीब 1 लाख 78 हजार 533 गौवंशीय तथा 12 हजार 776 भैंसवंशीय पशुधन उपलब्ध है। इस प्रकार जिले में कुल 1 लाख 91 हजार 309 पशुधन मौजूद हैं, जो दुग्ध उत्पादन और पशुपालन गतिविधियों का मजबूत आधार बने हुए हैं।
देवभोग दुग्ध महासंघ और निजी डेयरियां खरीद रही दूध
जानकारी के अनुसार देवभोग दुग्ध महासंघ जिले से प्रतिदिन लगभग 17 हजार 200 लीटर दूध क्रय कर रहा है। वहीं निजी डेयरियों द्वारा भी किसानों से बड़ी मात्रा में दूध खरीदा जा रहा है।
इनमें हर्षन डेयरी सरायपाली द्वारा 6000 लीटर, शारदा डेयरी सरायपाली द्वारा 4000 लीटर, प्रगति डेयरी सरायपाली द्वारा 2000 लीटर, शारदा डेयरी पिथौरा द्वारा 4000 लीटर तथा गाया डेयरी महासमुंद द्वारा 1000 लीटर दूध प्रतिदिन खरीदा जा रहा है। निजी डेयरियों द्वारा कुल मिलाकर लगभग 17 हजार लीटर दूध प्रतिदिन खरीदा जा रहा है।
देवभोग दुग्ध महासंघ और निजी डेयरियों को मिलाकर जिले से प्रतिदिन करीब 34 हजार लीटर दूध का विपणन दुग्ध समितियों के माध्यम से किया जा रहा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है।
बढ़ रही दुग्ध सहकारी समितियों की संख्या
जिले में किसानों को दुग्ध विपणन से जोड़ने के लिए दुग्ध सहकारी समितियों का विस्तार किया जा रहा है। पहले जहां 131 सक्रिय दुग्ध समितियां संचालित थीं, वहीं अब 25 नई समितियों के गठन के बाद कुल 156 सक्रिय दुग्ध सहकारी समितियां कार्यरत हैं। इसके अलावा 30 नई समितियों के गठन का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है।
हरा चारा और साइलेज निर्माण पर जोर
दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुपालकों को उन्नत हरा चारा उत्पादन और साइलेज निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। हरा चारा पशुओं के लिए पौष्टिक आहार का प्रमुख स्रोत है, जिससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहता है और दूध उत्पादन में वृद्धि होती है।
अब तक 32 पशुपालकों को रायपुर जिले के टांक डेयरी फार्म, सेमरिया का भ्रमण कराकर साइलेज निर्माण की तकनीकी जानकारी दी गई है। वहीं 16 हितग्राहियों को चारा उत्पादन और साइलेज निर्माण के लिए अनुदान भी प्रदान किया गया है।
उन्नत नस्ल के पशुओं को बढ़ावा
जिले में उन्नत नस्ल के दुधारू पशुओं की संख्या बढ़ाने के लिए कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम भी लगातार संचालित किया जा रहा है। इससे अधिक संख्या में मादा बछियों का उत्पादन संभव हो रहा है और भविष्य में दुग्ध उत्पादन क्षमता बढ़ने की संभावना है।
महिलाओं और आदिवासी परिवारों को मिल रहा लाभ
महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण परिवारों को डेयरी व्यवसाय से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। महिला हितग्राहियों को 50 प्रतिशत अनुदान पर दो-दो गायों का वितरण किया जा रहा है। इस योजना के तहत अब तक 94 पशुपालकों को लाभ मिल चुका है।
इसके अलावा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से 50 आदिवासी परिवारों के लिए गाय वितरण योजना संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य आदिवासी परिवारों को डेयरी व्यवसाय से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना और आत्मनिर्भर बनाना है।
किसानों की आय बढ़ाने में मिल रही मदद
पशुधन विकास विभाग का कहना है कि जिले में दुग्ध उत्पादन, विपणन और पशुपालन से जुड़ी योजनाओं का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। डेयरी व्यवसाय किसानों और पशुपालकों के लिए आय का एक मजबूत स्रोत बनकर उभरा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
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