राज्य कृषि समाचार (State News)

नरवाई नहीं जलाई, मेड़ों पर लगाए नींबू; आधुनिक खेती से आदित्य कुशवाह ने बढ़ाई आमदनी, बने मिसाल  

08 जून 2026, भोपाल: नरवाई नहीं जलाई, मेड़ों पर लगाए नींबू; आधुनिक खेती से आदित्य कुशवाह ने बढ़ाई आमदनी, बने मिसालमध्यप्रदेश के विदिशा जिले के सिरोंज विकासखंड अंतर्गत ग्राम काजरी मढ़वास के प्रगतिशील कृषक श्री आदित्य कुशवाह ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर न केवल अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। नरवाई प्रबंधन, जायद फसलों के विविधीकरण, सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई तथा मेड़ पर बागवानी जैसे नवाचारों के माध्यम से उन्होंने कृषि को लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

 कृषक एवं क्षेत्र का परिचय

आदित्य कुशवाह ग्राम काजरी मढ़वास, ग्राम पंचायत घोसूआताल, विकासखंड सिरोंज, जिला विदिशा के निवासी हैं। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर अपनी खेती को नई दिशा दी है।

 नरवाई दहन की समस्या और समाधान की पहल

रबी सीजन में गेहूं की कटाई के बाद खेतों में बची नरवाई को जलाना लंबे समय से किसानों के बीच प्रचलित रहा है। इससे पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति, जैविक कार्बन और मित्र कीटों को भी नुकसान पहुंचता है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा गांव-गांव चौपाल आयोजित कर किसानों को जागरूक किया गया।

इन चौपालों में कृषि वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों ने नरवाई प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी तथा आधुनिक कृषि यंत्रों पर उपलब्ध शासन की अनुदान योजनाओं से किसानों को अवगत कराया।

 बदलाव की शुरुआत

विभागीय चौपालों से प्रेरित होकर युवा कृषक आदित्य कुशवाह ने नरवाई जलाने की परंपरा को छोड़ आधुनिक तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया। उन्होंने गेहूं की कटाई के बाद स्ट्रॉ रीपर मशीन का उपयोग कर नरवाई का प्रबंधन किया। इससे उच्च गुणवत्ता वाला भूसा तैयार हुआ, जो पशुओं के लिए पौष्टिक चारे के रूप में उपयोगी साबित हुआ। परिणामस्वरूप पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अतिरिक्त आर्थिक लाभ भी प्राप्त हुआ।

 बहुफसली चक्र और जायद फसलों का सफल प्रयोग

नरवाई प्रबंधन के बाद खेत की जुताई कर उन्होंने जायद मौसम में विभिन्न फसलों की खेती की। उन्होंने 2 बीघा क्षेत्र में मूंग, 1.5 बीघा क्षेत्र में उड़द तथा 1 बीघा भूमि में ग्रीष्मकालीन मक्का की बुआई की।

मूंग और उड़द जैसी दलहनी फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर उसकी उर्वरता में सुधार करती हैं। वहीं मक्का ने अतिरिक्त आय का अवसर प्रदान किया। इस बहुफसली प्रणाली से खेत वर्षभर उत्पादक बना रहा और आय के नए स्रोत विकसित हुए।

सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भर सिंचाई

सिंचाई के लिए बिजली पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से आदित्य कुशवाह ने 3 किलोवाट क्षमता का सोलर पंप स्थापित किया। अब वे सूर्य की ऊर्जा से सिंचाई कर रहे हैं, जिससे बिजली बिल का खर्च लगभग समाप्त हो गया है और सिंचाई समय पर उपलब्ध हो रही है। इससे उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आई है।

 मेड़ पर नींबू की बागवानी से अतिरिक्त आय

कृषक आदित्य कुशवाह ने खेत की मेड़ों का भी बेहतर उपयोग किया। उन्होंने अपनी कृषि भूमि की सीमाओं पर 100 नींबू के पौधे लगाए। वर्तमान में ये पौधे फल देना शुरू कर चुके हैं और स्थानीय बाजार में नींबू विक्रय से उन्हें नियमित अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। यह मॉडल सीमित संसाधनों में आय बढ़ाने का उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है।

 सुखद परिणाम और आर्थिक समृद्धि

आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने से आदित्य कुशवाह को अनेक लाभ प्राप्त हुए हैं। मिट्टी की उर्वरता सुरक्षित रही, पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध हुआ, जायद फसलों से अतिरिक्त आय अर्जित हुई, सौर ऊर्जा से सिंचाई लागत कम हुई तथा नींबू की बागवानी से स्थायी नकद आय का स्रोत विकसित हुआ।

जहां पहले रबी फसल के बाद खेत खाली पड़े रहते थे, वहीं अब उनका खेत वर्षभर हरा-भरा और उत्पादनशील बना रहता है। उनकी एकीकृत कृषि प्रणाली ने खेती को अधिक लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बनाया है।

 अन्य किसानों के लिए प्रेरणा

आज आदित्य कुशवाह विकासखंड सिरोंज में प्रगतिशील कृषक के रूप में पहचान बना चुके हैं। उनकी सफल खेती, सोलर पंप और मेड़ पर विकसित नींबू की बागवानी को देखने तथा उनसे सीखने के लिए आसपास के गांवों से किसान पहुंचते हैं। वे किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने और कृषि को व्यवसायिक दृष्टिकोण से विकसित करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

 आदित्य कुशवाह की सफलता यह सिद्ध करती है कि यदि किसान वैज्ञानिक सलाह, आधुनिक तकनीक और नवाचार को अपनाएं तो सीमित संसाधनों में भी कृषि को लाभकारी, टिकाऊ और समृद्ध बनाया जा सकता है।

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