किसानों की सफलता की कहानी (Farmer Success Story)राज्य कृषि समाचार (State News)

नौकरी छोड़ खेती को बनाया करियर! अब जैविक खेती से कर रहे लाखों की कमाई, दूसरे किसानों के लिए बने मिसाल

10 जुलाई 2026, रायपुर: नौकरी छोड़ खेती को बनाया करियर! अब जैविक खेती से कर रहे लाखों की कमाई, दूसरे किसानों के लिए बने मिसाल – छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र और कभी माओवाद प्रभावित रहे आमाबेड़ा तहसील के ग्राम चिचगांव निवासी प्रगतिशील किसान सोनूराम ध्रुव ने यह साबित कर दिया है कि यदि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सोच और सरकारी योजनाओं का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो खेती भी एक लाभदायक व्यवसाय बन सकती है। अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर (एमए) करने के बाद नौकरी की राह चुनने के बजाय उन्होंने खेती को अपना करियर बनाया। आज वे जैविक खेती के जरिए हर साल 8 लाख रुपये से अधिक की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं और क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।

उच्च शिक्षा के बाद खेती को बनाया करियर

सोनूराम ध्रुव ने अर्थशास्त्र विषय में एमए की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने अपनी शिक्षा का उपयोग नौकरी की तलाश में नहीं, बल्कि खेती की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में किया। लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि पर उन्होंने पारंपरिक खेती की बजाय आधुनिक तकनीक और जैविक पद्धतियों को अपनाया, जिससे वे आज एक सफल और आत्मनिर्भर किसान के रूप में पहचान बना चुके हैं।

2015 से शुरू की जैविक खेती, अब हैं प्रमाणित किसान

सोनूराम ने वर्ष 2015 में जैविक खेती की शुरुआत की। शुरुआती दौर में कई चुनौतियां आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार मेहनत और वैज्ञानिक तरीके अपनाने का परिणाम यह रहा कि आज वे राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) के तहत प्रमाणित किसान हैं। छत्तीसगढ़ प्रमाणीकरण समिति (CGOCERT) और भारत वानिकी एवं कृषि द्वारा निरीक्षण के बाद उन्हें जैविक खेती का प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया गया।

ड्रिप सिंचाई और एकीकृत कृषि प्रणाली से बढ़ी आय

अपने 10 एकड़ खेत में सोनूराम एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाते हैं। वे करीब चार एकड़ में शत-प्रतिशत जैविक सुगंधित चिन्नौर धान और औषधीय गुणों से भरपूर ब्लैक राइस (काला धान) की खेती करते हैं। इसके अलावा काली मिर्च के 400 पौधे लगाए हैं, जिनमें अब फल आना शुरू हो गया है। वे गेहूं, उड़द, कुल्थी, रागी और काली हल्दी की भी खेती करते हैं। आम की बागवानी और गौपालन भी उनकी आय के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। खेतों में ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने से कम पानी में बेहतर उत्पादन मिल रहा है।

खुद तैयार करते हैं जैविक खाद और कीटनाशक

सोनूराम रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भर नहीं हैं। वे नींबू, पपीता, हर्रा सहित स्थानीय संसाधनों से जीवामृत, जैविक घोल और जैविक कीटनाशक स्वयं तैयार करते हैं। इससे खेती की लागत में काफी कमी आई है और मिट्टी की उर्वरता भी बनी हुई है।

150 रुपये किलो बिकता है जैविक चिन्नौर चावल

मिट्टी की जांच में जैविक कार्बन की कमी सामने आने के बाद उन्होंने खेत में तिल की खेती शुरू की और फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर उसकी गुणवत्ता में सुधार किया। खरीफ सीजन में उन्हें प्रति एकड़ करीब 20 क्विंटल धान का उत्पादन मिलता है। उनका जैविक चिन्नौर चावल बाजार में लगभग 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक की कीमत पर बिकता है, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिलता है।

सालाना 8 लाख रुपये से अधिक की शुद्ध आय

जैविक खेती, बागवानी, गौपालन और अन्य कृषि गतिविधियों के जरिए सोनूराम ध्रुव आज हर साल 8 लाख रुपये से अधिक की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं। पूरे परिवार का सहयोग उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा

सोनूराम ध्रुव आज अपने क्षेत्र के किसानों को रासायनिक खेती छोड़कर जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे किसानों को आधुनिक तकनीकों, सरकारी योजनाओं और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग की जानकारी भी देते हैं। उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक कृषि तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर खेती को भी लाभदायक और टिकाऊ व्यवसाय बनाया जा सकता है।

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