राज्य कृषि समाचार (State News)

MBA की नौकरी छोड़ शुरू की खेती, 300 किसानों को जोड़ा और बनाया खुद का ब्रांड; मिला ‘राइस आइकॉन’ अवॉर्ड  

19 अगस्त 2026, रायपुर: MBA की नौकरी छोड़ शुरू की खेती, 300 किसानों को जोड़ा और बनाया खुद का ब्रांड; मिला ‘राइस आइकॉन’ अवॉर्ड  – छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के ग्राम केशवा निवासी मोहन चंद्राकर ने मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़कर खेती को व्यवसाय के रूप में अपनाया। MBA की पढ़ाई के बाद वर्ष 1997 से 2013 तक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करने के बाद उन्होंने वर्ष 2013 में खेती की ओर रुख किया। आज वे प्रगतिशील और नवाचारी किसान के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।

मोहन चंद्राकर जैविक और प्राकृतिक पद्धति से खेती करते हैं। उनके खेत में पारंपरिक, सुगंधित और औषधीय गुणों वाली धान की किस्मों के साथ काला गेहूं जैसी फसलें भी उगाई जाती हैं। वे जावफूल, विष्णुभोग, जोहा, चखव, संजवनी और पीहू पर्पल राइस जैसी धान की किस्मों का उत्पादन कर रहे हैं।

खुद की राइस मिल और ब्रांड से बेचते हैं उपज

मोहन चंद्राकर अपनी उपज का प्रसंस्करण खुद की राइस मिल में करते हैं। इसके बाद ‘तथास्तु- अच्छे लोग, अच्छा भोजन’ ब्रांड के माध्यम से उत्पादों को बाजार तक पहुंचाते हैं। इस तरह खेती के साथ प्रसंस्करण और ब्रांडिंग को जोड़कर उन्होंने अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार तैयार किया है।

300 किसानों को FPO से जोड़ा

वर्ष 2017 में उन्होंने तथास्तु फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (ऊर्जा कृषि FPO) का गठन किया। इसके जरिए करीब 300 किसानों को जोड़ा गया है। वे किसानों को आधुनिक तकनीक, फसल विविधीकरण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़ाव के बारे में मार्गदर्शन देते हैं। इससे कई किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिली है। खरीफ 2026 में वे कृषि विज्ञान केंद्र महासमुंद और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में पारंपरिक सुगंधित धान की किस्मों के पुनरुत्थान पर भी काम कर रहे हैं।

6 एकड़ बंजर जमीन पर लगाए 400 टीक के पौधे

मोहन चंद्राकर ने करीब 6 एकड़ बंजर जमीन पर 400 ऑस्ट्रेलियन टीक के पौधे लगाए थे। आज ये पौधे 20 से 30 फीट तक ऊंचे हो चुके हैं। वर्ष 2024 से वे सफेद चंदन के 200 पौधों के साथ आम, महुआ, जामुन, चीकू, अमरूद और अन्य फलदार व उपयोगी पेड़ों का भी संरक्षण और रोपण कर रहे हैं। वे वृक्षारोपण को आने वाली पीढ़ी के लिए ‘फिक्स डिपॉजिट’ मानते हैं और खेत के साथ पेड़-पौधों के संरक्षण पर भी जोर दे रहे हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान

मोहन चंद्राकर के कृषि नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। वर्ष 2018 में उन्हें ICAR, नई दिल्ली में श्रेष्ठ नवाचार किसानों के साथ संवाद का अवसर मिला। अप्रैल 2026 में उन्हें ‘राइस आइकॉन ऑफ इंडिया सम्मान’ से सम्मानित किया गया। इसके बाद 4 जून 2026 को रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें ‘नवाचार एवं प्रगतिशील किसान सम्मान’ प्रदान किया।

मोहन चंद्राकर का खेती का सफर इस बात की मिसाल है कि आधुनिक तकनीक, फसल विविधीकरण, प्रसंस्करण और ब्रांडिंग को अपनाकर किसान कृषि को एक सफल व्यवसाय के रूप में विकसित कर सकते हैं।

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