जबलपुर: कृषि मंथन -2026 में आकर्षण का केंद्र बना एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल
13 अप्रैल 2026, जबलपुर: जबलपुर: कृषि मंथन -2026 में आकर्षण का केंद्र बना एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल – जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में गत दिनों आयोजित राज्य स्तरीय कृषि मंथन- 2026 में कृषि विभाग के निर्देशन में युवा कृषक श्री तन्मय दास द्वारा प्रदर्शित सतत एकीकृत कृषि प्रणाली का मॉडल चर्चा का विषय रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, लोक निर्माण विभाग मंत्री श्री राकेश सिंह एवं किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत बरबड़े ने इस मॉडल का बारीकी से अवलोकन किया और इसकी सराहना करते हुए इसे किसानों की आय दोगुनी करने का सबसे प्रभावी जरिया बताया।
जबलपुर इंजिनियरिंग कॉलेज के इलेक्ट्रिकल इंजियनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र तन्मय ने पाटन विकासखण्ड के ग्राम लम्हेटा स्थित अपनी करीब साढ़े तीन एकड़ कृषि भूमि पर एकीकृत कृषि प्रणाली को अपनाया है। तन्मय जैविक पद्धति से गेहूं और धान की फसल लेने के साथ पशुपालन, मुर्गी पालन, बतख पालन, बकरी पालन एवं मत्स्य पालन भी कर रहे हैं और हर माह लगभग 80 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।
क्या है यह सतत एकीकृत कृषि प्रणाली?:- सतत एकीकृत कृषि प्रणाली एक ऐसी वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित है जहाँ खेती के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन और बागवानी को एक ही स्थान पर एकीकृत किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें एक इकाई का अवशेष दूसरी इकाई के लिए संसाधन बन जाता है।
शून्य अपशिष्ट :- पशुओं के गोबर से बायोगैस और खाद बनाई जाती है, जिसका उपयोग खेतों में होता है। वहीं, फसलों के अवशेष पशुओं के चारे के काम आते हैं। लागत में भारी कमी :- बाजार से खाद और कीटनाशक खरीदने की जरूरत न्यूनतम हो जाती है, जिससे खेती की लागत घटती है। साल भर आमदनी:- केवल फसल कटाई पर निर्भर रहने के बजाय, किसान को दूध, अंडे, फल और सब्जियों के माध्यम से दैनिक या साप्ताहिक आय प्राप्त होती रहती है।
पर्यावरण संरक्षण :- यह प्रणाली पूरी तरह से प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। आत्मनिर्भरता :- किसान को खाद, बीज और चारे के लिए बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
मिट्टी का स्वास्थ्य :- रासायनिक खादों की जगह जैविक कचरे और गोबर खाद के उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।
जोखिम प्रबंधन :- यदि किसी कारणवश एक फसल खराब होती है, तो पशुपालन या मत्स्य पालन से किसान की आय सुरक्षित रहती है। कृषि मंथन में प्रदर्शित किये गये सतत एकीकृत कृषि प्रणाली के इस मॉडल को कृषि विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों की समर्पित टीम ने कड़ी मेहनत से तैयार किया।
इस मॉडल की सफलता के पीछे संयुक्त संचालक कृषि के एस नेताम और उप संचालक कृषि डॉ एस के निगम का कुशल मार्गदर्शन रहा। मॉडल के तकनीकी क्रियान्वयन और प्रदर्शन में अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन डॉ इंदिरा त्रिपाठी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी पंकज शर्मा तथा कृषि विस्तार अधिकारी हितेश ख्यालिया एवं दीपांशु सोनी सराहनीय योगदान रहा। इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता अन्तर्विभागीय समन्वय रही, जिसमें पशुपालन विभाग और मत्स्य विभाग ने सहभागिता निभाते हुए एक पूर्ण कृषि चक्र का जीवंत प्रदर्शन किया।
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