मुख्यमंत्री ने कृषि मंथन कार्यक्रम में कृषि नवाचारों एवं आधुनिक तकनीकों का किया अवलोकन
13 अप्रैल 2026, जबलपुर: मुख्यमंत्री ने कृषि मंथन कार्यक्रम में कृषि नवाचारों एवं आधुनिक तकनीकों का किया अवलोकन – जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित कृषि मंथन 2026 कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि क्षेत्र में नवाचार, आधुनिक तकनीक तथा प्राकृतिक खेती आधारित लगभग 40 से अधिक मॉडल का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में कृषि सखी प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण मॉडल, प्राकृतिक खेती मॉडल, ड्रोन हाईटेक हब, पराली कटिंग हार्वेस्टर मशीन, बैटरी ऑपरेटेड रिच प्लांटर की ड्रिप लाइन इंस्टालर सहित विभिन्न उपयोगी मॉडल प्रस्तुत किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इनका अवलोकन किया और कृषि के क्षेत्र में किये गये नवाचारों को सराहा।
कृषि विश्वविद्यालय के एमटेक अंतिम वर्ष के छात्र आर्यन चंद्र द्वारा विकसित “प्लांट डॉक्टर” डिवाइस विशेष आकर्षण का केंद्र रही। यह मल्टी क्रॉप डिजीज डिटेक्शन सिस्टम है, जिसके माध्यम से 10 से अधिक फसलों तथा 45 से अधिक पौधों की बीमारियों की पहचान की जा सकती है। इस डिवाइस में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे पौधों की बीमारी का विश्लेषण कर त्वरित रिपोर्ट तैयार होती है। रिपोर्ट में रोग के प्रकार, हानिकारक सूक्ष्मजीवों अथवा कीटों से बचाव के उपायों की जानकारी भी उपलब्ध होती है। डिवाइस की विशेषता इसकी कम लागत, पोर्टेबिलिटी तथा ऑफलाइन एवं रियल टाइम उपयोग की सुविधा है।
इनपुट संसाधन केंद्र परियोजना संचालक आत्मा के मार्गदर्शन में विकासखंड पनागर के ग्राम मोहनिया के कृषक अनिल पटेल द्वारा बायो डाइजेस्ट यूनिट का प्रदर्शन किया गया। इस मॉडल के माध्यम से प्राकृतिक खेती हेतु घरेलू जैविक अपशिष्ट, गोबर, गोमूत्र तथा अन्य जैविक पदार्थों से 45 दिवस में लगभग 200 लीटर जैविक खाद तैयार करने की प्रक्रिया बताई गई। यह मॉडल प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने में उपयोगी सिद्ध हो रहा है।
प्रधानमंत्री नमो ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत प्रशिक्षित ग्राम जोगीढाना की सपना काची द्वारा ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन किया गया। उन्होंने बताया कि ड्रोन के माध्यम से फसलों में दवाई, खाद एवं पानी का छिड़काव कम समय और कम लागत में किया जा सकता है। उन्होंने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने हेतु प्रेरित किया।
कार्यक्रम में सीमांत एवं लघु कृषकों के सुरक्षित आजीविका संवर्धन हेतु सतत एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल भी प्रस्तुत किया गया। इस मॉडल में पशुपालन, मत्स्य पालन एवं कृषि को एकीकृत रूप से जोड़कर संसाधनों के बेहतर उपयोग की जानकारी दी गई। मॉडल के माध्यम से यह बताया गया कि पशुओं एवं पक्षियों से प्राप्त जैविक अपशिष्ट को मत्स्य पालन एवं कृषि में उपयोग कर उत्पादन लागत कम की जा सकती है तथा भूमि की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है।कृषि मंथन कार्यक्रम में प्रस्तुत इन नवाचारों ने कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, तकनीकी उन्नयन तथा प्राकृतिक खेती की दिशा में उपयोगी पहल का संदेश दिया।
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