राज्य कृषि समाचार (State News)

कटनी: विद्यार्थियों को हाइड्रोपोनिक्स का तकनीकी प्रशिक्षण दिया

13 अप्रैल 2026, कटनीकटनी: विद्यार्थियों को हाइड्रोपोनिक्स का तकनीकी प्रशिक्षण दिया – स्वामी विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय स्लीमनाबाद में स्नातक स्तर के विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत प्राचार्या डॉ. सरिता पांडे के मार्गदर्शन में जैविक कृषि विशेषज्ञ रामसुख दुबे द्वारा जैविक खेती का प्रशिक्षण जा रहा है। इसी क्रम में विद्यार्थियों को कृषि विशेषज्ञ द्वारा होइड्रोपोनिक्‍स का तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया।

 विद्यार्थियों को बताया गया कि बिना मिट्टी के पौधे को पानी के ऊपर उगाने की तकनीक जल संवर्धन या हाइड्रोपोनिक्स कहलाती है। इस विधि में मिट्टी की आवश्यकता नहीं होती। इसमें पौधे के बीज को अंकुरित कर ऐसा रखा जाता है कि उसकी जड़ पानी में झूलती रहे इस स्थिति में पानी को हमेशा साफ रखा जाता है और पानी को बदलते रहना पड़ता है।  इस तकनीक में पानी के जरिए ही उसमें खनिज और विटामिन पदार्थ दिया जाता है। पौधों को मिट्टी की पूर्ण अनुपस्थिति में पोषक तत्वों के घोल में उगाया जाता है। यहां जड़ों को स्थिरता देने के लिए मिट्टी को वर्मीक्यूलाइट, रेत, बजरी, परलाइट जैसे रोगाणुहीन माध्यमों से प्रतिस्थापित किया जाता है। इस विधि में सब्जियां, टमाटर एवं स्ट्रॉबेरी आदि का उत्पादन किया जाता है। कृषि विशेषज्ञ ने बताया कि इस तकनीक से फसल के उत्पादन में वृद्धि अच्‍छी होती है तथा कीट एवं रोग कम लगते हैं।        

 प्रशिक्षण के क्रम में हाइड्रोपोनिक्स सेटअप के अंतर्गत घटक कंटेनर, ग्रो ट्रे, वृद्धि का माध्यम, पोषक तत्व समाधान तथा हाइड्रोपोनिक्स सेटअप के प्रकार, उतार और प्रवाह प्रणाली, पोषक तत्व, फिल्म तकनीक, ड्रिप तथा विक सिस्टम, एरोपोनिक्स तथा हाइड्रोपोनिक्स खेती के लाभ की भी तकनीकी जानकारी दी गई।   हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से पौधे उगाने के कई फायदे हैं। पौधे तेजी से बढ़ते हैं, इसलिए उपज अधिक होती है। कहीं भी उगाया जा सकता है। जहां पारंपरिक खेती संभव नहीं है, वहां पौधे उगाए जा सकते हैं। पानी और पोषक तत्वों को पुनः नवीनीकरण और पुनः उपयोग किया जा सकता है उर्वरकों या कीटनाशकों का उपयोग किए बिना जैविक सब्जियों का उत्पादन भी किया जा सकता है।

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