राज्य कृषि समाचार (State News)

दलहन मिशन को मिलेगी रफ्तार, सरगुजा में 130 एकड़ में आधुनिक तकनीक से शुरू हुई अरहर की वैज्ञानिक खेती

15 जुलाई 2026, रायपुर: दलहन मिशन को मिलेगी रफ्तार, सरगुजा में 130 एकड़ में आधुनिक तकनीक से शुरू हुई अरहर की वैज्ञानिक खेती – छत्तीसगढ़ में दलहन उत्पादन बढ़ाने और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से खरीफ सीजन के दौरान समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों के खेतों में सीड-कम-फर्टी ड्रिल जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर अरहर की वैज्ञानिक बुवाई कराई जा रही है। इस पहल का उद्देश्य दलहन फसलों का रकबा और उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की उत्पादन लागत कम करना तथा उनकी आय में वृद्धि करना है।

इसी क्रम में सरगुजा जिले के ग्राम सोहगा, बरकेला, खजूरी, कुबेरपुर और कुमडेवा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), जबलपुर के सहयोग से लगभग 130 एकड़ क्षेत्र में अरहर का समूह अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन स्थापित किया गया है। प्रदर्शन के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि वे नई तकनीकों को अपनाकर बेहतर उत्पादन हासिल कर सकें।

कम पानी में अधिक उत्पादन दे रही अरहर

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार बदलती जलवायु परिस्थितियों और सिंचाई जल की सीमित उपलब्धता को देखते हुए अरहर किसानों के लिए एक लाभकारी और टिकाऊ फसल के रूप में उभर रही है। वैज्ञानिक पद्धति से इसकी खेती करने पर कम पानी में भी अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है। इसी उद्देश्य से किसानों के खेतों में सीड-कम-फर्टी ड्रिल मशीन के माध्यम से कतार पद्धति से अरहर की बुवाई कराई गई है।

सीड-कम-फर्टी ड्रिल से घटेगी लागत, बढ़ेगा उत्पादन

विशेषज्ञों ने बताया कि सीड-कम-फर्टी ड्रिल तकनीक से बीज और उर्वरक का एक साथ संतुलित प्रयोग किया जाता है। इससे बीज और उर्वरक की बचत होती है, श्रम लागत कम होती है तथा पौधों के बीच समान दूरी बनाए रखने से बेहतर अंकुरण और स्वस्थ वृद्धि सुनिश्चित होती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक किसानों की लागत घटाने के साथ उत्पादन बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

किसानों को दिया गया वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण

कार्यक्रम के दौरान किसानों को संतुलित उर्वरक प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, पोषक तत्वों के समुचित उपयोग तथा अरहर फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन की वैज्ञानिक जानकारी दी गई। साथ ही खरपतवार नियंत्रण के लिए अनुशंसित शाकनाशी उपलब्ध कराकर शुरुआती अवस्था में प्रभावी खरपतवार प्रबंधन अपनाने पर भी जोर दिया गया। वैज्ञानिकों ने किसानों को समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) और समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) अपनाने तथा समय पर कृषि कार्य करने की सलाह दी।

आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए आगे आए किसान

अरहर बुवाई कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और सीड-कम-फर्टी ड्रिल व कतार पद्धति से खेती के लाभों को समझते हुए आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने में रुचि दिखाई। कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने बताया कि प्रदर्शन प्लॉटों का नियमित तकनीकी मार्गदर्शन और निगरानी जारी रखी जाएगी, ताकि किसानों को अधिकतम उत्पादन के साथ बेहतर आर्थिक लाभ मिल सके। राज्य में इस तरह के वैज्ञानिक प्रदर्शन कार्यक्रम दलहन मिशन को नई गति देने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएंगे।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture