राज्य कृषि समाचार (State News)

बीकानेर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, 8750 किसानों को जोड़ने और 70 क्लस्टर विकसित करने की तैयारी

20 जून 2026, बीकानेर: बीकानेर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, 8750 किसानों को जोड़ने और 70 क्लस्टर विकसित करने की तैयारी – राजस्थान सरकार के निर्देशों के तहत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गुरुवार को कृषि भवन स्थित आत्मा सभागार में जिला स्तरीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों, अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों ने प्राकृतिक खेती के महत्व, इसके लाभ और राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत जिले में चल रही गतिविधियों की जानकारी साझा की।

किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील

कार्यक्रम में वक्ताओं ने किसानों से प्राकृतिक खेती के महत्व को समझने और इसकी शुरुआत कम से कम एक एकड़ क्षेत्र से करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक खेती स्वस्थ मृदा और समृद्ध किसान की अवधारणा पर आधारित है तथा इससे खेती की लागत कम करने के साथ भूमि की उर्वरता बढ़ाने में मदद मिलती है।

70 क्लस्टर में 8750 किसानों को जोड़ने का लक्ष्य

उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत राज्य में कुल 1800 क्लस्टर स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से बीकानेर जिले को 70 क्लस्टर आवंटित किए गए हैं। इन क्लस्टरों के माध्यम से जिले के 8750 किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके जरिए जिले में प्राकृतिक खेती के क्षेत्रफल का विस्तार किया जाएगा और किसानों को रसायन मुक्त खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

कृषि सखियां गांव-गांव करेंगी मार्गदर्शन

प्राकृतिक खेती को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए जिले के 60 क्लस्टरों में प्रत्येक क्लस्टर के लिए दो-दो कृषि सखियों (सीआरपी) का चयन किया गया है। ये कृषि सखियां गांवों में किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों, जैविक उत्पादों के उपयोग और खेती में स्थानीय संसाधनों के महत्व के बारे में जानकारी देंगी। कृषि विभाग के अनुसार चयनित कृषि सखियों को प्रति माह 5 हजार रुपये मानदेय तथा मोबाइल उपयोग के लिए एकमुश्त 4 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर भी होंगे स्थापित

कार्यशाला में बताया गया कि प्राकृतिक खेती कार्यक्रम के तहत जिले में 6 बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर चयनित किए गए हैं। प्रत्येक केंद्र को एक लाख रुपये की सहायता राशि दो किश्तों में प्रदान की जाएगी। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले जैविक उत्पादों और तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

रसायन मुक्त खेती से सुधरेगा मृदा स्वास्थ्य

विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक खेती पूरी तरह रसायन मुक्त खेती है, जिसमें खेत पर उपलब्ध संसाधनों तथा देशी गाय के गोबर और गोमूत्र का उपयोग किया जाता है। खेती में जीवामृत, बीजामृत, पंचगव्य, ब्रह्मास्त्र, अग्नास्त्र और वर्मीवॉश जैसे जैविक उत्पादों का उपयोग कर बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या में वृद्धि होती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।

किसानों ने साझा किए अनुभव

कार्यशाला में कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं पर किसानों के साथ विस्तृत चर्चा की। कृषि सखियों और प्रगतिशील किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए तथा प्राकृतिक खेती से होने वाले लाभों की जानकारी दी। कार्यक्रम में विभिन्न जनप्रतिनिधियों, कृषि विशेषज्ञों और अधिकारियों ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संयुक्त निदेशक कृषि मदनलाल ने की। उन्होंने सभी अतिथियों और किसानों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन का रूप देने के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण और मृदा स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाया जा सके।

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