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महावीरा जिरोन पावर प्लस से मिलेगा न्यूट्रिशन का सिक्सर: श्री पाण्डेय

15 जून 2026, इंदौरमहावीरा जिरोन पावर प्लस से मिलेगा न्यूट्रिशन का सिक्सर: श्री पाण्डेय – देश में डीएपी की उपलब्धता को लेकर समय-समय पर बनने वाली चुनौतियों तथा मिट्टी में बढ़ते पोषक तत्व असंतुलन के बीच किसानों को ऐसे उर्वरकों की आवश्यकता है, जो केवल फसल उत्पादन ही नहीं बढ़ाए, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य को भी बनाए रखें। किसानों को संतुलित पोषण उपलब्ध कराने की इसी सोच के साथ आर. एम. फॉस्फेट्स एंड केमिकल्स प्रा. लि. (आरएमपीसीएल) ने महावीरा जिरोन पावर प्लस विकसित किया है। कंपनी की “न्यूट्रिशन का सिक्सर” अवधारणा पर आधारित यह उत्पाद फसलों को छह महत्वपूर्ण पोषक तत्व उपलब्ध कराकर संतुलित पोषण प्रदान करता है। यह बात आरएमपीसीएल के हेड एग्रोनॉमिस्ट श्री प्रमोद कुमार पाण्डेय ने कृषक जगत से विशेष बातचीत में कही।

श्री पाण्डेय ने बताया कि किसानों द्वारा लंबे समय से यूरिया और डीएपी के असंतुलित उपयोग के कारण मिट्टी में जिंक, बोरॉन, सल्फर और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की कमी बढ़ रही है। इसका असर फसल उत्पादन, गुणवत्ता तथा मिट्टी की संरचना पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि महावीरा जिरोन पावर प्लस इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है, ताकि किसानों को एक ही उत्पाद में संतुलित एवं बहु पोषक तत्व आधारित पोषण उपलब्ध कराया जा सके और उनके निवेश पर बेहतर प्रतिफल सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने कहा कि इसी सोच को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने “न्यूट्रिशन का सिक्सर” अवधारणा विकसित की है। इसका आशय ऐसे संतुलित पोषण से है, जिसमें फसल को एक साथ छह महत्वपूर्ण पोषक तत्व उपलब्ध हों। कंपनी का मानना है कि जिस प्रकार क्रिकेट में सिक्सर मैच का रुख बदल देता है, उसी प्रकार छह आवश्यक पोषक तत्वों का संतुलित संयोजन मिट्टी और फसल दोनों की उत्पादकता को नई दिशा दे सकता है।

कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री विनीत जैन की सोच का उल्लेख करते हुए श्री प्रमोद कुमार पाण्डेय ने कहा कि आरएमपीसीएल का मानना है कि किसान द्वारा कृषि में लगाया गया प्रत्येक रुपया उसे पोषण, उत्पादन अथवा गुणवत्ता वृद्धि के रूप में प्रतिफल अवश्य देना चाहिए। श्री जैन के मार्गदर्शन में कंपनी ऐसे उत्पाद विकसित करने पर विशेष ध्यान दे रही है, जो किसानों की वास्तविक समस्याओं और खेत की आवश्यकताओं के अनुरूप हों। उन्होंने कहा कि केवल उर्वरक बेचना कंपनी का उद्देश्य नहीं है, बल्कि किसानों को बेहतर लाभप्रदता, संतुलित पोषण और टिकाऊ खेती के समाधान उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इसी सोच का परिणाम महावीरा जिरोन पावर प्लस है, जिसे “न्यूट्रिशन का सिक्सर” अवधारणा के साथ विकसित किया गया है। यह उत्पाद फसल को संतुलित बहु पोषक तत्व उपलब्ध कराकर उत्पादन, गुणवत्ता और मिट्टी की सेहत में सुधार के माध्यम से किसान के निवेश पर बेहतर प्रतिफल दिलाने का प्रयास करता है।

श्री पांडेय के अनुसार वर्तमान समय की आवश्यकता ऐसे उर्वरकों की है जो फसलों को एक साथ कई आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध करा सकें। उन्होंने कहा कि मिश्रित एवं पोषक तत्व आधारित उर्वरक मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के साथ-साथ फसलों की गुणवत्ता और उत्पादकता में भी सुधार करते हैं।

डीएपी पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर उन्होंने कहा कि इसके लगातार उपयोग से मिट्टी में फास्फोरस का असंतुलन बढ़ता है, जबकि जिंक, बोरॉन, सल्फर और मैग्नीशियम जैसे तत्वों की कमी सामने आती है। परिणामस्वरूप पौधों की जड़ें कमजोर होती हैं और पोषक तत्वों के अवशोषण की क्षमता घट जाती है।

इस संदर्भ में उन्होंने महावीरा जिरोन पावर प्लस का उल्लेख करते हुए कहा कि यह उत्पाद कंपनी की “न्यूट्रिशन का सिक्सर” सोच का व्यावहारिक स्वरूप है। इसमें फास्फोरस, पोटाश, सल्फर, जिंक, बोरॉन और मैग्नीशियम सहित छह प्रमुख पोषक तत्व शामिल हैं, जो फसलों की संतुलित वृद्धि में सहायक हैं। उनके अनुसार यह उर्वरक मिट्टी की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

डीएपी और महावीरा जिरोन पावर प्लस में अंतर -श्री पाण्डेय ने बताया कि डीएपी मुख्य रूप से नाइट्रोजन और फास्फोरस उपलब्ध कराता है, जबकि महावीरा जिरोन पावर प्लस फास्फोरस और पोटाश के साथ सल्फर, जिंक, बोरॉन एवं मैग्नीशियम जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व भी प्रदान करता है। डीएपी के लगातार उपयोग से जहां कुछ पोषक तत्वों का असंतुलन बढ़ सकता है, वहीं महावीरा जिरोन पावर प्लस का उद्देश्य फसल को संतुलित पोषण उपलब्ध कराकर मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना है।

“न्यूट्रिशन का सिक्सर” क्यों?

फास्फोरस – मजबूत जड़ विकास एवं प्रारंभिक बढ़वार।
पोटाश – पौधों की मजबूती एवं तनाव सहनशीलता।
सल्फर – प्रोटीन निर्माण एवं गुणवत्ता सुधार।
जिंक – प्रकाश संश्लेषण एवं वृद्धि में सहायक।
बोरॉन – परागण, फूल एवं दाना बनने में महत्वपूर्ण।
मैग्नीशियम – क्लोरोफिल निर्माण एवं हरियाली के लिए आवश्यक।

महावीरा जिरोन पावर प्लस की प्रमुख खूबियां –

छह आवश्यक पोषक तत्वों से युक्त संतुलित मिश्रित उर्वरक।
ग्रेड : 16:19:11 + 0.5% सल्फर + 0.5% जिंक + 0.20% बोरॉन + 0.5% मैग्नीशियम।
डीएपी की तुलना में अधिक व्यापक एवं संतुलित पोषण।
मजबूत जड़ विकास एवं बेहतर पोषक तत्व अवशोषण।
उत्पादन के साथ फसल की गुणवत्ता में सुधार।
मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य बनाए रखने में सहायक।
धान, गेहूं, सोयाबीन, कपास, मक्का, दलहन एवं तिलहन फसलों के लिए उपयोगी।

श्री पाण्डेय ने कहा कि “न्यूट्रिशन का सिक्सर” केवल एक विपणन संदेश नहीं, बल्कि किसान की आय, मिट्टी की सेहत और फसल उत्पादकता को एक साथ बेहतर बनाने की अवधारणा है। कंपनी का लक्ष्य है कि किसान को एक ही उत्पाद में ऐसा संतुलित पोषण मिले, जिससे उत्पादन बढ़े, गुणवत्ता सुधरे और निवेश पर बेहतर लाभ प्राप्त हो। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि उर्वरकों का चयन केवल परंपरा के आधार पर नहीं, बल्कि मिट्टी परीक्षण और फसल की आवश्यकता के अनुसार करना चाहिए। संतुलित पोषण अपनाने से उत्पादन लागत पर बेहतर नियंत्रण के साथ अधिक उपज और स्वस्थ मिट्टी दोनों प्राप्त किए जा सकते हैं।

श्री पाण्डेय ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारतीय कृषि में पोषक तत्व आधारित उर्वरकों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी तथा “न्यूट्रिशन का सिक्सर” जैसी अवधारणाएं टिकाऊ खेती को नई दिशा देंगी।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें : 89569 26412

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