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राज्य कृषि समाचार (State News)

किसानों के लिए फायदे की खेती: हरी खाद अपनाएं, लागत होगी कम और 20% तक बढ़ सकता है उत्पादन

09 जुलाई 2026, रायपुर: किसानों के लिए फायदे की खेती: हरी खाद अपनाएं, लागत होगी कम और 20% तक बढ़ सकता है उत्पादन – बढ़ती खेती लागत और लगातार घटती मिट्टी की उर्वरता के बीच हरी खाद किसानों के लिए एक प्रभावी और किफायती विकल्प बनकर उभर रही है। कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, रायगढ़ के वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे रासायनिक उर्वरकों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय हरी खाद और हरी पत्तियों की खाद का अधिक से अधिक उपयोग करें। इससे न केवल मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि खेती की लागत कम होने के साथ फसलों की पैदावार में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।

35 से 45 दिन में तैयार हो जाती है प्राकृतिक खाद

वैज्ञानिकों के अनुसार ढैंचा, सनई, मूंग, उड़द, लोबिया और ग्वार जैसी दलहनी फसलों को बुवाई के 35 से 45 दिन बाद खेत में पलट देने पर वे प्राकृतिक जैविक खाद में बदल जाती हैं। इस प्रक्रिया से प्रति हेक्टेयर 50 से 60 किलोग्राम तक नाइट्रोजन की पूर्ति होती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसलों को आवश्यक पोषक तत्व आसानी से मिलते हैं।

हरी पत्तियां भी बढ़ाती हैं मिट्टी की ताकत

विशेषज्ञों ने बताया कि नीम, करंज, ग्लिरिसिडिया और सहजन की हरी पत्तियों का उपयोग भी मिट्टी के लिए बेहद लाभकारी है। इन्हें खेत में मिलाने से जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है और लाभकारी सूक्ष्मजीव अधिक सक्रिय होते हैं। इससे मिट्टी की संरचना बेहतर होती है, पानी धारण करने की क्षमता बढ़ती है और फसलों का विकास भी बेहतर होता है।

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कम होगी लागत, बढ़ेगा उत्पादन

वैज्ञानिकों का कहना है कि हरी खाद अपनाने से रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम हो जाती है, जिससे खेती की लागत घटती है। इसके साथ ही विभिन्न परीक्षणों में फसलों की उपज में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। खासतौर पर धान की खेती में उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता और पोषक तत्वों की मात्रा में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिला है।

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