राज्य कृषि समाचार (State News)

मध्य प्रदेश में कृषि विकास के लिए पीपीपी मॉडल जरूरी: डॉ. अग्रवाल

नकली आदानों के बाजार पर लगे रोक

07 मई 2025, भोपाल: मध्य प्रदेश में कृषि विकास के लिए पीपीपी मॉडल जरूरी: डॉ. अग्रवाल – धानुका भारत की अग्रणी पौध संरक्षण कंपनियों में से एक है, जो अपने अभिनव फसल संरक्षण समाधानों और कृषि उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता के लिए प्रसिद्ध है। 40 से अधिक वर्षों के अनुभव के साथ, धानुका फसल की पैदावार बढ़ाने और टिकाऊ खेती का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किए गए उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद प्रदान करता है। किसानों और खेती की प्रचुरता और ग्राहकों की संतुष्टि के लिए धानुका की प्रतिबद्धता इसे कृषि सफलता और खेत समृद्धि को आगे बढ़ाने में एक विश्वसनीय भागीदार बनाती है। कंपनी के चेयरमैन एमिरिट्स डॉ. आर.जी. अग्रवाल ने अपने भोपाल प्रवास के दौरान कृषक जगत को बताया कि मध्य प्रदेश में कृषक हितैषी योजनाओं को जमीनी स्तर पर उतारने एवं छोटे किसानों तक तकनीकी जानकारी पहुंचाने के लिए पीपीपी मॉडल के विस्तार की जरूरत है जिससे प्रदेश और देश में तेजी से कृषि योजनाएं और तकनीक क्रियान्वित हो सके, और प्रमुख फसल सोयाबीन की उत्पादकता बढ़े, साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को बड़े पैमाने पर बिक रहे नकली एवं अमानक आदान व कीटनाशकों पर रोक लगाने की आवश्यकता है जिससे किसानों के साथ धोखा न हो।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि देश के 14 करोड़ किसानों को और 6.5 लाख गांवों की जरूरत केवल सरकार या कोई एक संस्था पूरी नहीं कर सकती इसके लिए मिलकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि म.प्र. कृषि विभाग से धानुका के साथ मिलकर पीपीपी आधारित कार्यक्रम प्रारंभ करने का आग्रह किया है जिससे छोटे किसानों तक उन्नत तकनीक की जानकारी के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण जानकारी समय पर उपलब्ध हो सके।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि पूर्व में वर्ष 2000 में धानुका ने मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप के तहत कृषि विस्तार अभियान संचालित किया था इससे क्षेत्र के सोयाबीन कृषकों को लाभ हुआ था और उत्पादन में लगभग 20 से 30 फीसदी वृद्धि हुई थी। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार वर्ष 2007 में बीजोपचार के लिए हर बीज को  वीटावेक्स टीका शुरू किया गया था जो फसलों के लिए काफी उपयोगी साबित हुआ। इन विस्तार गतिविधियों के फलस्वरूप होशंगाबाद को बेस्ट एग्रीकल्चर डिस्ट्रिक्ट का सम्मान राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद से प्राप्त हुआ था।

डॉ. अग्रवाल ने वर्तमान में किसानों की तीन प्रमुख समस्याओं पर चर्चा की जिसमें आधुनिक कृषि तकनीकों तक सीमित पहुंच, उत्पादों के लिए उचित मूल्य न मिलना, और उच्च गुणवत्ता वाले असली कृषि उत्पादों की कमी शामिल हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इन मुद्दों को हल करने के लिए किसानों के लिए जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएं। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि केवल वैध बिलों के साथ कृषि इनपुट्स खरीदें और पैकेजिंग पर मौजूद क्यूआर कोड के जरिए उत्पाद की प्रमाणिकता जांचें। उन्होंने कहा कि छोटे किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार को कीटनाशकों पर जीएसटी 18 की जगह 5 फीसदी करना चाहिए। विदेशों में किसानों को भारत की तुलना में बहुत अधिक सब्सिडी दी जाती है जिसका लाभ सभी किसानों को मिलता है।

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चेयरमैन  ने बताया कि धानुका एग्रीटेक, अपने आईसीएआर तथा देश के 15 कृषि विश्वविद्यालय के साथ हुए समझौतों  के तहत, देशभर में राज्य-स्तरीय जागरूकता अभियानों, किसान प्रशिक्षण कार्यक्रमों, और डीलरों के लिए जागरूकता सत्रों का आयोजन कर रहा है, ताकि वैज्ञानिक खेती और असल कृषि उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके।

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डॉ. अग्रवाल ने बताया कि धानुका कंपनी भारतीय कृषि प्रणाली में प्रौद्योगिकियों को विशेष रूप से जापान से आयात करने की दिशा में निरंतर अग्रसर है। जिससे देश में कृषि उत्पादन तथा उत्पादकता बढऩे के साथ-साथ कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।  डॉ. अग्रवाल से मुलाकात के दौरान धानुका एग्रीटेक लि. के प्रेसिडेंट श्री चेतन सरावगी एवं डीजीएम भोपाल श्री संजय सिंह भी उपस्थित थे।

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