कुक्कुट खाद : कम लागत में उपज बढ़ाने और मिट्टी की सेहत सुधारने का प्रभावी जैविक विकल्प
01 जुलाई 2026, भोपाल: कुक्कुट खाद : कम लागत में उपज बढ़ाने और मिट्टी की सेहत सुधारने का प्रभावी जैविक विकल्प – आधुनिक कृषि ने देश में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग ने खेती के सामने कई नई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। उर्वरकों की लगातार बढ़ती कीमतें, मिट्टी की उर्वरता में कमी, जैविक कार्बन का क्षरण, लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या में गिरावट और पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याएं किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। ऐसे में विशेषज्ञ अब ऐसी कृषि पद्धतियों पर जोर दे रहे हैं, जो कम लागत वाली होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी हों।
इन्हीं विकल्पों में कुक्कुट खाद (पोल्ट्री खाद) एक अत्यंत प्रभावी जैविक उर्वरक के रूप में सामने आई है। यह उपलब्ध जैविक खादों में सबसे अधिक पोषक तत्वों से भरपूर मानी जाती है। इसमें अधिकांश अन्य पशु-आधारित खादों की तुलना में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, जो पौधों की वृद्धि और बेहतर उत्पादन के लिए आवश्यक प्रमुख पोषक तत्व हैं।
कुक्कुट खाद का नियमित उपयोग मिट्टी की संरचना में सुधार करता है। इससे मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती है, हवा का संचार बेहतर होता है और लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता में वृद्धि होती है। परिणामस्वरूप पौधों की जड़ों का विकास अच्छा होता है और वे पोषक तत्वों का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग कर पाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार कुक्कुट खाद में पर्याप्त मात्रा में जैविक पदार्थ भी मौजूद होता है, जो मिट्टी में कार्बनिक तत्वों की कमी को दूर करने में मदद करता है। इससे लंबे समय तक मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता धीरे-धीरे कम की जा सकती है। इससे खेती की लागत घटती है और किसानों की आय में भी सुधार होता है।
हालांकि, कुक्कुट खाद का उपयोग अच्छी तरह सड़ी-गली या कम्पोस्ट की गई अवस्था में ही करना चाहिए। ताजी खाद में अमोनिया की मात्रा अधिक हो सकती है, जिससे पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसलिए खेत में प्रयोग से पहले इसे उचित तरीके से सड़ाना या कम्पोस्ट बनाना आवश्यक है।
कुक्कुट खाद का उपयोग धान, गेहूं, मक्का, दलहन, तिलहन, सब्जियों, फलों और बागवानी फसलों में सफलतापूर्वक किया जा सकता है। यदि इसे मृदा परीक्षण की सिफारिशों के अनुसार संतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों के साथ एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) के तहत उपयोग किया जाए, तो बेहतर उत्पादन और मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता दोनों सुनिश्चित की जा सकती हैं।
बदलते समय में टिकाऊ और लाभकारी खेती की दिशा में कुक्कुट खाद एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभर रही है। यह न केवल किसानों की उत्पादन लागत कम करने में सहायक है, बल्कि मिट्टी की सेहत सुधारने, पर्यावरण संरक्षण और जैविक एवं प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग को भी बढ़ावा देती है। ऐसे में भविष्य की टिकाऊ कृषि के लिए कुक्कुट खाद का वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग एक प्रभावी कदम माना जा रहा है।
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